उत्तर-पूर्वी राज्यों पर फिल्म प्रभाग का विशेष पैकेज 'कलर्स ऑफ़ नॉर्थ ईस्ट'

- ब्यूरो रिपोर्ट -

मुंबई। सूचना-प्रसारण मंत्रालय की इकाई फिल्म प्रभाग 'आजादी का अमृत महोत्सव' उत्सव के एक हिस्से के रूप में फिल्मों के विशेष पैकेज 'कलर्स ऑफ़ नॉर्थ ईस्ट' के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों के उल्लेखनीय आदिवासी नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के साथ समृद्ध संस्कृति और विरासत का जश्न मना रहा है। इस पैकेज में उल्लेखनीय हस्तियों से लेकर क्षेत्र के सांस्कृतिक, सामाजिक, साहित्यिक और राजनीतिक इतिहास तक की फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों को फिल्म्स डिवीजन की वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है।

इसमें दिखाई जा रही फिल्में इस प्रकार हैं--

लोकोप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई (इंग्लिश /1994/20 मिनट/आर. वासुदेवन और शुभंकर घोष)- इस पैकेज की शुरुआत असम के स्वतंत्रता सेनानी डॉ. गोपीनाथ बोरदोलोई की जीवनी कथा से होती है। यह फिल्म उनके जन्म, शिक्षा और देश को आज़ाद कराने के लिए उनके बलिदान के बारे में जानकारी देती है।

रानी मा गैदिन्लिउ (इंग्लिश /1998/10 मिनट/चारु कमल हजारिका)- रानी मा गैदिन्लिउ की एक प्रेरक कहानी प्रस्तुत करती हैं, जो नगालैंड की एक स्वतंत्रता सेनानी और सामाजिक धार्मिक सुधारक थीं।

ज्योति प्रसाद: द वर्सेटाइल जीनियस (इंग्लिश /1997/63 मिनट/चारु कमल हजारिका)- यह ऑफबीट जीवनी फिल्म असम की कलात्मक दुनिया में एक नया मोड़ देने वाले व्यक्तित्व ज्योति प्रसाद अग्रवाल पर है।

राजा ऑफ़ नोंगखलाव (इंग्लिश /2005/38मिनट/गौतम चौधरी)- यह फिल्म मेघालय के दूरदर्शी नेता यू तिरोत सिंह और देश की आजादी के लिएउनके संघर्ष पर है।

यू तिरोत सिंग और यू कियांग नांगबाह, द पैट्रियट्स (इंग्लिश /2011/52मिनट/एस. स्वीटी डिएंगदोह) -यह फिल्म अपने गहन चित्रण के साथ मेघालय के दो स्वतंत्रता सेनानियोंयू तिरोत सिंग और यू कियांग नंगबाह के योगदान पर प्रकाश डालती है।

इंडियाज स्ट्रगल फॉर फ्रीडम:टेल्स ऑफ करेज (हिंदी/ 1986/20मिनट/अरिबम श्याम शर्मा) - यह फिल्म आज़ादी की लड़ाई में 1857 से ही मणिपुर के योगदान के इतिहास को बताती है। उस समय मणिपुर पर महाराजा चंद्र कीर्ति सिंह का शासन था।

राजर्षि भाग्यचंद्र ऑफ़ मणिपुर (इंग्लिश /2007/56 मिनट/अरिबम श्याम शर्मा) - यह फिल्म भाग्यचंद्र के जीवन को एक मैतेई योद्धा और राजा, एक धन्य वैष्णव और धार्मिक सुधारक, एक आध्यात्मिक दूरदर्शी और उत्कृष्ट कलाकार के रूप में प्रकट करती है। उन्होंने मणिपुरी रास की रचना की थी जो भारत के सभी शास्त्रीय नृत्यों में सबसे उत्कृष्ट है।

सत्र्स एंड नामघर्स ऑफ़ असम (इंग्लिश /2000/20 मिनट /भूपेन हजारिका) - यह फिल्म असमिया पहचान की उत्पत्ति के विकास में सत्र और नामघर की भूमिका पर प्रकाश डालती है। सत्र और नामघर शंकराचार्य द्वारा स्थापित किए गए थे। धार्मिक पहलू के साथ यह असमिया सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया।

हिज मैजेस्टी,द अहोम्स (इंग्लिश/2011/52 मिनट /तपन कुमार गोगई) - अहोम्स ने असमिया समुदाय के इतिहास और पहचान के साथ-साथ अपने राज्य असम की भौगोलिक सीमा को भी आकार दिया है।

ट्रिब्यूट टू अरुणाचल (हिंदी/1993/39मिनट/चंद्रशेखर नायर) - अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है। यह फिल्म अपने लोगों और स्थानों के माध्यम से राज्य की विविध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करती है।

मणिपुर (इंग्लिश /1972/15मिनट/बेनॉय रॉय) यह फिल्म घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों में मणिपुर के लोगों के आकर्षक जीवन और उनके आकर्षक त्योहारों और नृत्यों को प्रस्तुत करती है।

हार्ट ऑफ़ डार्कनेस (इंग्लिश /2011/52मिनट/चंद्र नारायण बरुआ) - मेघालय की गुफाओं को ढकने वाले रहस्य केल पर्दे को तराशे हुए चमत्कारों की एक आकर्षक दुनिया को प्रकट करने के लिए उठाया गया है।

आर्कियोलॉजी एंड मोनुमेंट्स ऑफ़ त्रिपुरा (इंग्लिश /2012/54 मिनट /श्यामल घोष) - यह फिल्म त्रिपुरा से मिले मंदिरों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों, स्मारकों और पुरावशेषों का दस्तावेज है।

माई लैंड,माई पीपल (इंग्लिश /1969/28मिनट/अरुण चौधरी) - यह फिल्म नगालैंड की भूमि और वहां के लोगों का रिकॉर्ड है और इस क्षेत्र के विकास और संस्कृति को विस्तार से दिखाती है।

सिक्किम (इंग्लिश /1975/11 मिनट/जे.एस. बांदेकर) - उत्तर-पूर्वी हिमालय में बसे सिक्किम को पारंपरिक रूप से आध्यात्मिक शांति के निवास के रूप में देखा जाता रहा है। यह फिल्म 1890 से सिक्किम के राजनीतिक इतिहास को बयां करती है।

एम्चैंटिंग मिजोरम (इंग्लिश /1976/27मिनट/ए.एन.परमेश) - यह फिल्म मिजोरम की कृषि सम्‍पदा,बुनाई परंपरा और प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करती है।

यह विशेष पैकेज https://filmsdivision.org/डॉक्यूमेंट्री ऑफ़ द वीक और https://www.youtube.com/user/Films Division  पर दिखाया जा रहा है।

Popular posts from this blog

जुनूनी एंकर पत्रकार रोहित सरदाना की कोरोना से मौत

ऑडियो-वीडियो लेखन पर हिंदी का पहला निशुल्क पाठ्यक्रम 28 जनवरी से होगा शुरू

'कम्युनिकेशन टुडे' ने पूरा किया 25 साल का सफ़र, मीडिया शिक्षा की 100 वर्षों की यात्रा पर विशेषांक