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बढ़ रही हैं मीडिया की मुश्किलें

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न्यूयॉर्क स्थित संगठन ‘पोलीस प्रोजेक्ट’ की हालिया रिपोर्ट कहती है कि सरकार भारत में पत्रकारों को धमकाकर, गिरफ्तारी या फर्जी मामले दर्ज करके या किसी तरह की पाबंदियां लगाकर चुप करवा रही है। जो सरकार के खिलाफ बोलते हैं उन पर देशद्रोह जैसे मुकदमों और गिरफ्तारी का खतरा लगातार बना रहता है। देश में मीडिया को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। संगठन ‘पोलीस प्रोजेक्ट’ की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि देश में विभिन्न स्थानों पर पत्रकारों को काम करने से रोका जाता है और मीडिया के काम में बाधा डालने का काम सीधे सरकार की ओर से या उसके समर्थकों की तरफ से किया जाता है। -श्याम माथुर- पिछले हफ्ते पूरा देश पर्वों और त्योहारों की खुमारी में डूबा हुआ था। कोरोना वायरस के खौफ से आजाद होने की खुशी ने पर्व का मजा दोगुना कर दिया था। पर्वों से जुड़े उल्लास के माहौल के बीच देशभर के मीडिया ने न्यूयॉर्क स्थित संगठन ‘पोलीस प्रोजेक्ट’ की उस रिपोर्ट को अनदेखा कर दिया, जिसमें कहा गया है कि भारत में पत्रकारिता एक खतरनाक पेशा बन गया है। देश में मीडिया कर्मियों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है

फिल्म इंडस्ट्री में अब लौटेगी दिवाली जैसी रौनक

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अनुमान है कि कोरोना काल में फिल्म इंडस्ट्री को लगभग पांच हजार करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। इस दौरान फिल्म उद्योग से जुड़े अनेक कामगारों की जिंदगी में मुश्किलों का स्थायी बसेरा हो गया। यहां तक कि देशभर के सिनेमाघरों से जुड़े कामगार भी रोजी-रोटी को तरस गए। लेकिन अब जबकि वीरान पड़े सिनेमाघर फिर से आबाद होंगे , बड़े सितारों के जलवे जब एक बार फिर सिनेप्रेमियों को अपनी गिरफ्त में लेंगे , जब एक के बाद एक बड़ी फिल्में रिलीज होंगी , तो दर्शक सिनेमाघरों में लौटने लगेंगे। -श्याम माथुर- राजधानी दिल्ली और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सिनेमाघर और मल्टीप्लैक्स को खोलने की अनुमति मिलने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में उम्मीद की एक नई लहर दौड़ गई है। कोरोना वायरस के कारण करीब-करीब दो साल तक सिनेमाघर और मल्टीप्लैक्स बंद रहे और बाद में जब कोरोना के हालात में सुधार नजर आने लगा , तो कुछ राज्यों में तमाम शर्तों के साथ सिनेमाघर खोलने की अनुमति दी गई थी। लेकिन चूंकि देशभर में समान रूप से ऐसी अनुमति नहीं थी , लिहाजा न तो सिनेमाघर पूरी तरह खुल सके और न ही फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों को सिनेमाघरों में रिलीज करने में

आर्यन खान को फिर जेल में ही गुजारनी होगी रात, 27 दिन बाद कल होगी घर वापसी

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- ब्यूरो रिपोर्ट - मुंबई। ड्रग्स मामले में गिरफ्तार हुए आर्यन खान को बेल तो मिल गई है , लेकिन आज भी उसकी रिहाई नहीं हो पाई , क्योंकि उसका रिलीज ऑर्डर वक्त पर आर्थर रोड जेल नहीं पहुंच पाया। यानी आर्यन को एक और रात जेल में ही गुजारनी होगी। शनिवार 30 अक्टूबर की सुबह उसे जेल से रिहा किया जाएगा। नियम के तहत किसी को भी जमानत मिलने पर शाम के साढ़े 5 बजे के पहले ऑर्थर रोड जेल के बाहर लगे बॉक्स में जमानत पत्र डाल दिया जाता है तो उसके कुछ देर बाद जेल से रिहाई मिल जाती है। हालांकि इसके बाद पत्र डालने पर अगले दिन सुबह 6 बजे जमानत पेटी खोली जाती और उसके कुछ घंटों के बाद जमानत मिल जाती है। आर्यन खान को गुरुवार 28 अक्टूबर की शाम बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दे दी थी। लेकिन बेल ऑर्डर रिलीज नहीं किया गया। शुक्रवार को करीब 3 बजे के बाद डीटेल्ड बेल ऑर्डर रिलीज हुआ। आर्यन के वकील बेल ऑर्डर लेकर एनडीपीएस कोर्ट पहुंचे। लेकिन जेल तक पहुंचते-पहुंचते 5:30 से ज्यादा वक्त हो गया। जेल प्रशासन की तरफ से रिहाई नहीं देते हुए कहा गया कि किसी को भी स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया जाएगा , नियम सभी के लिए समान हैं। आर्यन ख

कन्नड़ स्टार पुनीत राजकुमार का निधन, कर्नाटक सरकार ने दिए सिनेमाघरों को तुरंत बंद करने के आदेश

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- ब्यूरो रिपोर्ट - मुंबई। कन्नड़ सुपरस्टार पुनीत राजकुमार का आज दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनकी उम्र महज 46 साल थी। पुनीत राजकुमार की मौत जिम में वर्कआउट के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हुई।  30 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके पुनीत राजकुमार की अचानक हुई मौत से सिनेमा इंडस्ट्री सदमे में है। दिवंगत प्रसिद्ध कन्नड़ स्टार राजकुमार अवर्गल के बेटे पुनीत राजकुमार की मौत के बाद कर्नाटक सरकार ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है , साथ ही सिनेमाघरों को तुरंत बंद करने के आदेश भी दिए गए हैं। पुनीत राजकुमार को खोने के गम में नेता से लेकर अभिनेता तक उनकी मौत पर शोक जता रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर उनके निधन पर दुख जताया। पुनीत के पिता राजकुमार साउथ इंडियन सिनेमा के आइकॉन थे। वे कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के पहले एक्टर थे , जिन्हें दादासाहेब फालके अवॉर्ड मिला था। चंदन तस्कर वीरप्पन ने जुलाई 2000 में तमिलनाडु से उनका अपहरण कर लिया था। पुनीत ने अपने करियर की शुरुआत एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में की थी , वे राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके थे। पुनीत राजकुमार की मौत के बाद

अभिव्यक्ति की आज़ादी की रक्षा करने वाले पत्रकारों के नाम रहा नोबेल शांति पुरस्कार

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-ब्यूरो रिपोर्ट- नई दिल्ली। फिलीपींस की पत्रकार मारिया रेसा और रूस के पत्रकार दिमित्री मुरातोव को नोबेल शांति पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया है। दोनों पत्रकारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के उनके प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जा रहा है , जो लोकतंत्र और स्थायी शांति के लिए पहली शर्त है। नार्वे की नोबेल समिति ने शुक्रवार को इन पुरस्कारों की घोषणा की। मारिया रेसा फिलीपींस के समाचार संगठन ' रैपलर ' की सीईओ हैं। नोबेल कमेटी ने बताया कि मारिया रेसा और उनके मीडिया संगठन को राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतर्ते की सरकार के कामों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए कई बार निशाना बनाया जा चुका है। वह गलत जानकारियों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का भी एक अहम हिस्सा हैं। 2018 में टाइम मैग्जीन ने उन्हें पर्सन ऑफ़ द ईयर की उपाधि दी थी। यूनेस्को के अनुसार मारिया ने पत्रकारिता के दायरे को बढ़ाया है। विरोधाभास परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। मारिया इससे पहले सीएनएन के लिए करीब दो दशक तक दक्षिण पूर्व एशिया में खोज पत्रकार के रूप में भी कम कर चुकी हैं। ' रिपोर्टर्स वि

जिनके लिए एक अभिशाप है बुढ़ापा!

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  एक तरफ हम नौजवानों का देश होने का दम भर रहे हैं , दूसरी तरफ देश में उम्रदराज आबादी आज तमाम समस्याओं का सामना कर रही है। आधुनिक जीवनशैली में बुजुर्गों का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। अकेलेपन के कारण बुजुर्ग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और इसकी वजह से उनमें निराशा और अवसाद की भावना घर करती जा रही है। ज्यादातर बुजुर्गों की दास्तान इतनी सी है कि नौकरी से रिटायर होने के बाद चूंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था , ऐसे में उनके घर वाले भी उनकी उपेक्षा करने लगे और यहीं से उनके एकाकीपन की यात्रा शुरू होती है। -श्याम माथुर- मौजूदा दौर में हम लगातार इस बात पर गर्व करते रहे हैं कि हमारा देश युवाओं का देश है , क्योंकि देश की आधी से ज्यादा आबादी नौजवानों की है। लेकिन इस उजली तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि आधुनिक जीवनशैली में बुजुर्गों का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। अकेलेपन के कारण बुजुर्ग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और लंबे समय तक कायम रहने वाली बीमारियों के कारण उनमें निराशा और अवसाद की भावना घर करती जा रही है। ऐसे बुजुर्ग मरीजों की इच्छा रहती है कि परिवार के लोग ही उनकी देखभाल करें। परन्तु ऐसा हमेशा सं

ड्रग्स के साथ पुराना है बॉलीवुड का याराना

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  - ब्यूरो रिपोर्ट - मुंबई। बॉलीवुड के साथ ड्रग्स का कनेक्शन एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि इस दफ़ा इसमें सीधे-सीधे कोई स्टार शामिल नहीं है बल्कि बॉलीवुड के बादशाह कहे जाने वाले शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान का नाम सामने आया है। दरअसल एनसीबी ने शनिवार आधी रात को मुंबई में एक क्रूज़ पर छापा मारा था। एनसीबी ने इस मामले में आर्यन समेत तीन लोगों को गिरफ़्तार किया था। एनसीबी के अनुसार इस छापे में कुल 13 ग्राम कोकीन , 21 ग्राम चरस , एमडीएम प्रतिबंधित दवा की 22 गोलियां और पांच ग्राम एमडी बरामद की गई। अगर आप इसे कोई बहुत बड़ी मात्रा समझ रहे हैं तो जान लीजिए कि भारत में हर साल दो से चार टन चरस और कम से कम 300 टन गांजा बरामद किया जाता है। बॉलीवुड में ड्रग्स के मामलों ने कई बार तूल पकड़ा है , हालाँकि आधिकारिक तौर पर किसी तरह की गंभीर जाँच में कुछ नहीं साबित हुआ है। वैसे फ़िल्म जगत की कुछ हस्तियों को ड्रग्स के चलते जेल जाना पड़ा है तो कई हस्तियों ने ड्रग्स रिहैबिलिटेशन में अपना इलाज करवाया है। अभिनेता संजय दत्त का ड्रग्स लेना तो बॉलीवुड सितारों में सबसे चर्चित मामला रहा है। उनके पिता सुनील