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आगे निकलने की होड़ और दांव पर जिंदगी

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  निरंतर चुनौतियों के कारण हम सब एक अंधी दौड़ का हिस्सा बन गए हैं और बस , दौड़ते चले जा रहे हैं। न रास्ते की कोई खबर है और न मंजिल की कोई खबर। बेतहाशा दौड़ते-दौड़ते हम एक ऐसी अंधेरी सुरंग की ओर चले जाते हैं , जहां से निकलने का कोई रास्ता हमें नजर नहीं आता। बेहद गहराई के साथ तनाव हमारे जीवन से जुड़ गया है और चाहते हुए भी हम उससे मुक्ति नहीं पा सकते। अहम सवाल यह है कि क्या हम तनाव को अपने जीवन से दूर भगा सकते हैं ? शायद यह मुमकिन नहीं है। लेकिन हां , उसका ठीक तरीके से सामना जरूर कर सकते हैं। - श्याम माथुर - सिर्फ चालीस साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने के बाद अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और अपने पीछे छोड़ गए अनेक ऐसे सवाल जिनके जवाब का अगर गहराई से विश्लेषण किया जाए , तो निश्चित तौर पर एक ऐसी तस्वीर सामने आएगी , जो हमें बुरी तरह डराती है। इस तस्वीर में बेशुमार रंग हैं , लेकिन हर रंग खौफ और बेबसी की एक ऐसी दुनिया हमारे सामने पेश करता है , जिसमें नकली कहकहे हैं , दिखावटी भरोसा है , पाखंड और झूठ से भरपूर जिंदगी है और दूसरे तमाम लोगों से आगे निकलने की एक बनावटी और खोख

नेताओं की बदजुबानी और बड़बोलापन

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सियासती शतरंज में शह और मात का खेल खेलने वाले हमारे नेता आजकल शब्दों की मर्यादा से भी खेल रहे हैं। हालांकि यह कोई नया खेल नहीं है , लेकिन हैरान तब होती है जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोग भी राजनीतिक विमर्श या संवाद का स्तर गिराने में अपना योगदान दे चुके हैं। सियासी बदजुबानी के इस दौर में एक केंद्रीय मंत्री एक मुख्यमंत्री को चांटा लगाने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर करे , इससे ज्यादा शर्मनाक बात हो नहीं सकती। हालांकि इस इच्छा की कीमत केंद्रीय मंत्री को जेल जाकर चुकानी पड़ी। ऐसे में हम हम अपने आप से सवाल करने लगते हैं कि क्या हमने ऐसे बदतमीज और बदजुबान लोगों के हाथों में देश की बागडोर सौंपी है। - श्याम माथुर - नेताओं की बदजुबानी और उनका बड़बोलापन खुद उनके लिए कितना महंगा पड़ जाता है , इस सवाल का जवाब केंद्रीय मंत्री नारायण राणे से बेहतर और कौन दे सकता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अपशब्द कहने के मामले में केंद्रीय मंत्री राणे को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया , जहां से जमानत मिलने के बाद ही वे बाहर आए। उन्होंने एक बयान में कह दिय

नेशनल फिल्म आर्काइव ने किया ऑनलाइन फिल्म पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन

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- ब्यूरो रिपोर्ट - पुणे। देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में देश ' आजादी का अमृत महोत्सव ' मना रहा है , ऐसे में नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया , पुणे ने फिल्मों की एक विशेष आभासी प्रदर्शनी - ' चित्रांजलि @ 75: ए प्लेटिनम पैनोरमा ' का आयोजन किया है।  इस ऑनलाइन प्रदर्शनी की शुरुआत केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और पर्यटन तथा संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने किया। दृश्य प्रलेखन का एक पेनोरमा प्रस्तुत करती यह ऑनलाइन प्रदर्शनी स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अब तक की देश की यात्रा पर नज़र डालती है। यह डिजिटल संग्रह स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों की बहादुरी और बलिदान को दर्शाने वाले भारतीय सिनेमा को प्रस्तुत करता है। यह उन फिल्मों को दर्शाता है जो समाज की अंतर्धाराओं को प्रदर्शित करती हैं और विभिन्न सामाजिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त करती हैं और जिन्होंने वर्दी में सशस्त्र बल के नायकों को अमर कर दिया। ' चित्रांजलि @ 75 ' प्रदर्शनी विभिन्न भाषा की फिल्मों के 75 पोस्टरों और तस्वीरों के माध्यम से देशभक्ति के विभिन्न भावों को प्रस्तुत कर

बोल कि लब आजाद हैं तेरे!

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बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब केंद्र सरकार पूरे देश में कहीं भी डिजिटल मीडिया के लिए कोड ऑफ कंडक्ट या नीति संहिता लागू नहीं कर सकेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि डिजिटल मीडिया पर अपने विचार व्यक्त करने की आजादी अब बरकरार रहेगी। फैसला देते समय अदालत ने लोकतंत्र में असहमति की जरूरत पर टिप्पणी भी की। अदालत ने  कहा, ‘देश के सही प्रशासन के लिए जन सेवकों के लिए आलोचना का सामना करना स्वास्थ्यप्रद है, लेकिन 2021 के नियमों की वजह से किसी को भी इनकी आलोचना करने के बारे में दो बार सोचना पड़ेगा।’ - श्याम माथुर - जो लोग देश में अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के लिए निरंतर संघर्ष कर रहे हैं, आपकी और हमारी वैचारिक स्वतंत्रता के लिए लगातार लड़ाई लड़ रहे हैं और स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया को कायम रखने के लिए हर पल जद्दोजहद कर रहे हैं, उन्हें पिछले दिनों बॉम्बे हाई कोर्ट ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने नए डिजिटल मीडिया नियमों के दो प्रावधानों पर रोक लगा दी है। अदालत ने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 के नियम 9(1) और 9(3) पर रोक

वैचारिक आजादी पर मंडराते खतरे

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क्या कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अभिव्यक्ति की हमारी आजादी में हस्तक्षेप कर सकता है? क्या कोई भी सोशल मीडिया कंपनी अपने कारोबार के लिए हमारी राजनीति को निर्धारित कर सकती है? ट्विटर को लेकर उठा ताजा मामला सिर्फ राहुल गांधी या कांग्रेस का मामला नहीं है, बल्कि यह हम सबकी वैचारिक स्वतंत्रता से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है। क्या हम किसी भी प्लेटफॉर्म को अपनी वैचारिक आजादी के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति दे सकते हैं? - मन्जु माहेश्वरी - सोशल मीडिया के प्रभावी प्लेटफॉर्म ट्विटर के लिए यह बड़ी दिलचस्प स्थिति है। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने आरोप लगाया था कि ट्विटर पर अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाने की कोशिशें की जा रही हैं। दरअसल ट्विटर कुछ दिनों पहले नए सरकारी नियमों के पालन में हुई देरी को लेकर सरकार के निशाने पर था। इस आरोप के बीच जून में ट्विटर ने तत्कालीन आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद का ही हैंडल एक घंटे के लिए बंद कर दिया था। कंपनी का कहना था कि प्रसाद के एक ट्वीट में उसके कॉपीराइट नियमों का उल्लंघन हुआ था, लेकिन प्रसाद ने कंपनी पर अभिव्यक्ति का हनन करने का आरोप लगाया था। सरकार के साथ ट्विट

भारतीय शहरों में कुल एक्टिव इंटरनेट यूजर्स में से 43 फीसदी महिलाएं

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भारत में कई सामाजिक पैमानों पर पुरुषों से पीछे रही महिलाएं इंटरनेट यूजर्स के तौर पर आधी आबादी बनने की ओर बढ़ रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय शहरों में कुल एक्टिव इंटरनेट यूजर्स में से 43 फीसदी महिलाएं हैं।    - ब्यूरो रिपोर्ट - जयपुर। सामाजिक पैमाने पर देश में हालांकि महिलाएं आज भी अपनी तरक्की के लिए और पुरुषों के बराबर खड़ा होने के लिए जूझ रही हैं , लेकिन अगर इंटरनेट के इस्तेमाल की बात करें , तो इस मामले में वे पुरुषों से कहीं पीछे नहीं हैं। सोशल मीडिया के बारे में एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारतीय शहरों में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों में महिलाओं की संख्या 43 प्रतिशत से अधिक है। इस रिपोर्ट में देश की डिजिटल क्रांति में महिलाओं की जरूरतों का अध्ययन भी किया गया है। रिपोर्ट कहती है कि अनेक ऐसे ऐप हैं , जिनका इस्तेमाल सिर्फ महिलाएं ही करती हैं , जैसे- मॉम्सप्रेसो , ममा अर्थ , नाइका , पर्पल , पीरियड ट्रेकर , हीलोफाई , कैरेट लेन और माइलो। नाइका भारतीय स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने वाली ऐसी पहली कंपनी होगी , जो एक महिला उद्योगपति का स्टार्टअप है। नाइका के पीछे हैं बैंकर

महामारी के बाद एक नए खतरे की आहट

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  दुनिया के तमाम देशों में मेडिकल वेस्ट एक ऐसे पहाड़ का रूप ले चुका है , जो भूमि और समुद्र को प्रदूषित कर रहा है। सर्जिकल मास्क और दस्ताने से लेकर डिस्पोजेबल गाउन और एप्रन तक- ये सब मिलकर हमारी धरती के लिए एक नया खतरा पैदा कर रहे हैं। महामारी के दौरान प्लास्टिक माइक्रोफाइबर से बने करीब 129 अरब डिस्पोजेबल मास्क और 65 अरब डिस्पोजेबल दस्ताने का इस्तेमाल हर महीने किया गया। पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल किया गया प्लास्टिक इसके अलावा है। यह सारा प्लास्टिक फिर से लैंडफिल साइट या समुद्र में पहुंच जाएगा। - श्याम माथुर - देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी मिले हुए सात दशक से अधिक बीत चुके हैं और आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मनाने की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन पर्यावरण संकट से आजादी हमें आज तक नहीं मिली है। हवा से लेकर मिट्टी और पानी तक सभी प्रदूषित हैं। आए दिन सामने आने वाली रिपोर्टें कहती हैं कि शहरों की आबोहवा सांस लेने लायक नहीं बची है और प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। हाल के दौर में कोविड-19 के कारण उपजे हालात के बाद प्रदूषण को लेकर पहाड़ जैसी समस्या खड़ी हो चुकी है और इसस