आगे निकलने की होड़ और दांव पर जिंदगी

 निरंतर चुनौतियों के कारण हम सब एक अंधी दौड़ का हिस्सा बन गए हैं और बस, दौड़ते चले जा रहे हैं। न रास्ते की कोई खबर है और न मंजिल की कोई खबर। बेतहाशा दौड़ते-दौड़ते हम एक ऐसी अंधेरी सुरंग की ओर चले जाते हैं, जहां से निकलने का कोई रास्ता हमें नजर नहीं आता। बेहद गहराई के साथ तनाव हमारे जीवन से जुड़ गया है और चाहते हुए भी हम उससे मुक्ति नहीं पा सकते। अहम सवाल यह है कि क्या हम तनाव को अपने जीवन से दूर भगा सकते हैं? शायद यह मुमकिन नहीं है। लेकिन हां, उसका ठीक तरीके से सामना जरूर कर सकते हैं।

- श्याम माथुर -

सिर्फ चालीस साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने के बाद अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और अपने पीछे छोड़ गए अनेक ऐसे सवाल जिनके जवाब का अगर गहराई से विश्लेषण किया जाए, तो निश्चित तौर पर एक ऐसी तस्वीर सामने आएगी, जो हमें बुरी तरह डराती है। इस तस्वीर में बेशुमार रंग हैं, लेकिन हर रंग खौफ और बेबसी की एक ऐसी दुनिया हमारे सामने पेश करता है, जिसमें नकली कहकहे हैं, दिखावटी भरोसा है, पाखंड और झूठ से भरपूर जिंदगी है और दूसरे तमाम लोगों से आगे निकलने की एक बनावटी और खोखली जंग है।

दरअसल यह तस्वीर आज हम में से हरेक की जिंदगी का आईना बन चुकी है। निरंतर चुनौतियों के कारण हम सब एक अंधी दौड़ का हिस्सा बन गए हैं और बस, दौड़ते चले जा रहे हैं। न रास्ते की कोई खबर है और न मंजिल की कोई खबर। हालांकि तनाव की थोड़ी मात्रा अच्छी हो सकती है, जिससे आप बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। लेकिन अत्यधिक तनाव आपको इससे निपटने की क्षमता को क्षीण कर सकता है और आपको एक ऐसे अंधे कुए में धकेल सकता है, जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता आपको नजर नहीं आता।

कोई शख्स वित्तीय मामलों को लेकर, कोई बीमारी, तो कोई भावनात्मक रूप से विनाशकारी घटना जैसे कई कारणों से तनाव का अनुभव कर सकता है, जैसे जीवनसाथी की मृत्यु या काम से निकाल दिया जाना। हालांकि हमारा अधिकांश तनाव रोजमर्रा की छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से आता है। हम सब जानते हैं कि लंबे समय तक तनाव न केवल मानसिक स्वास्थ्य बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। तनावों के कारण हमारा शरीर मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है। तनाव से स्ट्रोक, दिल का दौरा, पेप्टिक अल्सर और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। और इन सबसे बड़ी बात यह है कि हमारे जीवन में तेजी से पसरते तनाव से लड़ने के लिए हम जरा भी कोशिश नहीं कर रहे।

अहम सवाल यह है कि क्या हम तनाव को अपने जीवन से दूर भगा सकते हैं? शायद यह मुमकिन नहीं है। बेहद गहराई के साथ तनाव हमारे जीवन से जुड़ गया है और चाहते हुए भी हम उससे मुक्ति नहीं पा सकते। लेकिन हां, उसका ठीक तरीके से सामना जरूर कर सकते हैं। इस दिशा में पहला कदम यह है कि हम तनाव के मूल कारण का पता लगाएं, क्योंकि तनाव से निपटने के तरीके तब तक प्रभावी नहीं होंगे जब तक वे मूल कारण को दूर नहीं करते हैं। कभी-कभी व्यक्ति महसूस कर सकता है कि वह एक निश्चित स्थिति के कारण तनावग्रस्त है लेकिन अंतर्निहित तनाव स्थिति के प्रति उसका दृष्टिकोण हो सकता है। दूसरा कदम तनाव को खत्म करना या तनाव की तीव्रता को कम करने की कोशिश करना है। और तीसरा कदम अपने व्यवहार में बदलाव लाना और कुछ आसान तकनीकों को अपनाना है।

जीवन में यथार्थवादी बनें- अवास्तविक लक्ष्य निर्धारित न करें और ध्यान रखें कि यदि आप हमेशा हर चीज में पूर्णता पाना चाहते हैं, तो आप कभी भी संतुष्ट नहीं होंगे। आज प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि वह भी दूसरे लोगों की तरह सुखी और संपन्न जीवन जिए तथा इसके लिए वह अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के फेर में तनाव का शिकार होता जा रहा है।

दूसरों की मदद लें- सुपरमैन बनने की कोशिश ना करें। अपने आप से पूछें, ‘‘मैं कितना कर सकता हूँ? क्या समय सीमा यथार्थवादी है? क्या मैं इसे अपने दम पर कर सकता हूं?’’ और अगर आपको मदद की जरूरत है तो इसके बारे में पूछने में संकोच ना करें।

नहीं कहना सीखें-नहीं, हमेशा नकारात्मक नहीं होता है। लोगों को प्रसन्न करने वाला रवैया अपनाना छोडें़ और हमेशा कोई प्रतिबद्धता बनाने या पक्ष देने से पहले इस बात पर विचार करें कि क्या यह आपके लिए सहज होगा। समय प्रबंधन को जानें- एक ही समय में सब कुछ करने की कोशिश करने से खुद को अभिभूत न करें। अपनी गतिविधियों को प्राथमिकता दें और उन्हें हटा दें जो आवश्यक नहीं हैं।

अपने दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं। परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ गुणवत्ता का समय बिताने से बंधन मजबूत होता है और सुरक्षा और अपनेपन की भावना पैदा होती है। यह आपको तनावों से लड़ने में मदद कर सकता है।

अपने अहंकार को खत्म करें। अहंकार के स्थान पर अपने जीवन को आरामदायक बनाएं। आप जितने कम अहंकारी होंगे, उतने ही आसानी से आप विफलताओं को झेल सकेंगे। ध्यान लगाएं और व्यायाम करें। ध्यान के दौरान, आप अपना ध्यान केंद्रित करते हैं और ऐसे उलझे विचारों को समाप्त करते हैं जो आपके दिमाग को उलझा सकते हैं और तनाव पैदा कर सकते हैं। शारीरिक व्यायाम मस्तिष्क में एंडोर्फिन को बढ़ावा देता है। ये एंडोर्फिन तनाव को कम करते हैं। इसी तरह पर्याप्त नींद लेना हर किसी के लिए महत्वपूर्ण होता है। अच्छी और गहरी नींद आपके मस्तिष्क को नए सिरे से कामकाज शुरू करने में मदद करती है और आपको केंद्रित रहने में मदद करती है। अपने लिए कुछ समय निकालें। हर दिन कम से कम आधा घंटा अपने लिए आरक्षित रखें। इस समय का उपयोग रचनात्मक होने के लिए और बाहरी प्रभावों के बिना अपने विचारों और भावनाओं को और बेहतर बनाने के लिए करें।

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