ऑक्सीजन के लिए हांफते देश में बढ़ने लगा ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का बाजार

 - ब्यूरो रिपोर्ट -

जयपुर। देश में लोग जिस तरह ऑक्सीजन के लिए तड़प रहे हैं और आज जब पूरे भारत में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है और कहीं भी वक्त पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है, ऐसे में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन थेरेपी के लिए एक बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। खासकर उन लोगों के लिए जो होम आइसोलेशन में हैं।



ज्यादा वक्त नहीं गुजरा, जब दिल्ली सहित भारत के तमाम बड़े शहर प्रदूषण की समस्या से जूझते नजर आ रहे थे और हर कोई प्रदूषण की बात कर रहा था और पीएम वैल्यू पर चर्चा कर रहा था। और पीएम के स्तर के साथ रेडियो-टेलीविजन पर आवाजें गूंज रही थी कि क्या आपका इस आबोहवा में सांस लेना दूभर हो गया है, तो आज ही ले आइए. फलाना कंपनी का एयरप्यूरीफायर' शुद्ध हवा की गारंटी, अब खुल के सांस लेना हुआ आसान! प्रदूषण के स्तर ने एक नए बाजार को खोला और देशभर में एयर प्यूरीफायर धड़ल्ले से बिकने लगे।

इसका नतीजा यह हुआ कि कई कंपनियां इस कारोबार में कूद पड़ीं। इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जीरो से शुरू हुआ ये कारोबार आज 200 करोड़ से भी ऊपर पहुंच चुका है। यही नहीं, इन्हें बेचने वाली कंपनी तो ये दावा तक करने लगीं कि इस उद्योग की वार्षिक वृद्धि दर 45 फीसद है, जिसकी बढ़कर 55-60 फीसद तक जाने की उम्मीद है। ये कारोबार और फलता फूलता, लेकिन इसी बीच कोरोना ने दस्तक दे दी। दुनिया थम सी गई और पिछले साल विश्व भर में प्रदूषण में काफी कमी देखने को मिली।

किसी ने 2021 की शुरूआत में यह सोचा भी नहीं था कि कोरोना एक बार फिर से पैर पसारेगा। और हालात ऐसे बन जाएंगे कि जिस देश की सत्ता ने यह घोषित कर दिया था कि हमने कोरोना को हरा दिया, वह देश ऑक्सीजन की कमी से जूझता नजर आएगा। हम इतने लाचार कभी नहीं रहे, जितने आज खड़े हुए हैं। लोग कोरोना से नहीं ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जरूरत की वजह से मर रहे हैं। लेकिन इस आपदा ने भी एक नए बाजार की नींव रख दी है और उपभोगी समाज अब जल्दी ही उसे अपनाएगा और फिर धीरे धीरे बाजार उसे पानी, हवा की तरह ही जरूरी बता कर घर घर पहुंचा देगा। और वो चीज है ऑक्सीजन कंसंट्रेटर।

यह कंप्यटूर मॉनिटर से थोड़ा ही बड़ा होता है। आज जब पूरे भारत में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है और कहीं भी वक्त पर ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पा रही है। ऐसे में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन थेरेपी के लिए एक बेहतर विकल्प बताया जा रहा है। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर एक मेडिकल डिवाइस है, जो आस-पास की हवा को इकट्ठा यानी संघनीकरण करता है। वातावरण में मौजूद हवा में 78 फीसद नाइट्रोजन, 21 फीसद ऑक्सीजन और बाकी बची एक फीसद दूसरी गैस होती हैं। ऑक्सीजन कंसंट्रेटरवातावरण से हवा को लेकर उसे एक छननी के माध्यम से फिल्टर करता है और ऑक्सीजन को एकत्रित करके उसमें घुली नाइट्रोजन और दूसरी गैस को बाहर निकाल देता है। फिर ऑक्सीजन कम्प्रेस्ड होकर एक नली के जरिये 90-95 फीसद शुद्ध ऑक्सीजन तैयार होकर वितरित हो जाती है।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में लगा प्रेशर वॉल्व ऑक्सीजन के वितरण को नियंत्रित करता है और इस तरह प्रति मिनट 1-10 लीटर ऑक्सीजन मिलती रहती है। 2015 की डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक कंसंट्रेटर लगातार काम जारी रखने के लिए तैयार किया गया है और यह 24 घंटे सातों दिन करीब 5 साल तक लगातार काम कर सकता है।

हालांकि लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन यानी एलएमओ की तरह ये 99 फीसद शुद्ध तो नहीं होती है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हल्के और हल्के-तीव्र कोविड मामलों में ये कारगर है। खासकर उनके लिए जिनका ऑक्सीजन सेचुरेशन स्तर 85 या उसके ऊपर आ रहा हो। खास बात ये है कि कोविड के अलावा दूसरे मामलों में जहां संक्रमण का खतरा नहीं हो, वहां एक कंसंट्रेटर से दो लोगों को साथ में ऑक्सीजन मुहैया कराई जा सकती है।

सिलेंडर ऑक्सीजन की तुलना में कंसंट्रेटर एक सहज उपाय है, लेकिन ये एक मिनट में 5 से 10 लीटर ऑक्सीजन प्रदान कर सकता है, जबकि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को प्रति मिनट 40 से 50 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इसलिए अभी इसे हल्के लक्षण वाले मरीजों के लिए सही माना जा रहा है। इसकी अच्छी बात ये है कि इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। और एलएमओ की तरह ऑक्सीजन को लाने ले जाने के लिए क्रायोजेनिक टैंकर की जरूरत नहीं रहती है। साथ ही सिलेंडर की तरह इसे बार बार भरवाने का झंझट नहीं रहता है। बस इसे चलाने के लिए बिजली की जरूरत होती है।

एक ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत आठ हजार से बीस  हजार रुपये  तक होती है जबकि इसकी तुलना में कंसंट्रेटर की कीमत 40 हजार से 90 हजार रुपये होती है। हालांकि यह एक बार का ही निवेश होता है, फिर इसमें पांच साल तक बिजली के अलावा कोई दूसरा खर्चा नहीं आता। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कंसंट्रेटर की मांग जो पहले प्रति साल 40 हजार थी, वह अब बढ़कर 30 हजार से 40 हजार प्रति माह तक आ पहुंची है। वर्तमान में हर दिन 1000 से 2000 कंसंट्रेटर की मांग आ रही है, लेकिन औद्योगिक इकाई नहीं होने की वजह से यह मांग भी पूरी नहीं हो पा रही है। वर्तमान में भारत में इसे पूरी तरह से विदेशों से मंगाया जा रहा है।

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