फिल्म समीक्षक और विश्लेषक सुनील मिश्र भी विदा हुए

जयसिंह रघुवंशी

भोपाल। कला-संस्कृतिकर्मी, लेखक, फिल्म समीक्षक और विश्लेषक सुनील मिश्र अब हमारे बीच नहीं रहे। उनका आज तड़के भोपाल में हृदय गति रुकने से निधन हो गया। सिनेमा लेखन की दुनिया में अपनी एक अलहदा पहचान बनाने वाले सुनील मिश्र मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग में कार्यरत थे।



तीन साल पहले उन्हें सर्वोत्तम फिल्म समीक्षक के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनका कहना था कि 'तकरीबन 20 साल की लेखन यात्रा को सम्मान मिला है। यह मेरा सम्मान नहीं, बल्कि उन कलाकारों, लेखकों व संस्कृतिकर्मियों का सम्मान है, जो अपनी रचनाधर्मिता की यात्रा छोटे शहरों से शुरू करते है। अव्वल तो फिल्मों पर लेखन मायानगरी मुंबई से शुरू होता है और वहीं खत्म होता है। पुरस्कार इस मायने में महत्वपूर्ण है कि पहली दफा मध्यप्रदेश के किसी संस्कृतिकर्मी व लेखक को मिला है।'

सुनील मिश्र लेखन के क्षेत्र में लंबा रियाज करते रहे। श्रेष्ठिजनों व गुरुजनों के सानिध्य में उन्होने अपनी कला को मांझा। बगैर किसी सम्मान और पुरस्कार की कामना किए वे अपना लेखन कर्म लगातार करते रहे, अंततः राष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में मेहनत का परिणाम निकला।

सुनील मिश्र ने अपनी लेखन यात्रा और कला पत्रकारिता की शुरूआत नईदुनिया से की थी। कला व फिल्म पत्रकार श्रीराम ताम्रकार उनके गुरु रहे। वे अक्सर कहा करते थे कि 'कला पत्रकारिता में उनका साथ मुझे वर्ष 1979 से मिला। मैंने लगातार उनके सानिध्य पत्रकारिता सीखी और लगातार रियाज करता रहा। यह पुरस्कार एक तरह से मेरे गुरुजनों को आदरांजलि है। वे मुझे सदैव याद रहेंगे।'

सुनील मिश्र भोपाल निवासी थे और सिनेमा पर विश्लेषणात्मक लेखन के लिए जाने जाते थे। राज्य और देश के अनेक उत्कृष्ट अखबारों में वे निरन्तर लिखते रहे। आकाशवाणी-दूरदर्शन के अलावा अनेक चैनलों के लिए उन्होंने सिनेमा केन्द्रित कार्यक्रमों का समन्वय-संयोजन किया। वह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि़द्यालय के अनेक सत्रों में फिल्म पत्रकारिता की कक्षाएं भी लेते थे। वे अनेक  अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में सहभागी रहे। उन्होंने अमिताभ बच्चन पर एक किताब एक दशक पहले लिखी थी। सुनील मिश्र भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा सिनेमा एवं रंगमंच पर तैयार किए गये परिभाषा कोष की सलाहकार समिति में भी रहे।

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