हमारी आत्मा को लहूलुहान करती हैं वेब सीरीज

प्रोडक्शन कंपनियों ने कोरोना महामारी के कारण लागू देशव्यापी लाॅकडाउन के दौरान लोगों के सामने वेब सीरीज का एक ऐसा गुलदस्ता पेश किया, जिसमें नर्म-नाजुक फूलों के स्थान पर कांटों की भरमार थी। कांटे भी ऐसे जिन्होंने लोगों  के दिलो-दिमाग को बुरी तरह लहूलुहान कर दिया।


कहते हैं कि हर आपदा में  कोई ना कोई अवसर छुपा होता है और जो कोई इस अवसर को पहचान जाता है, वह हमेशा फायदे में रहता है। ओवर द टाॅप (ओटीटी) प्लेटफाॅर्म के माध्यम से मनोरंजन की सामग्री परोसने वाली कंपनियों और फिल्म निर्माण से जुड़े स्टूडियो ने कुछ इसी तरह का परिचय दिया। इन प्रोडक्शन कंपनियों ने कोरोना महामारी के कारण लागू देशव्यापी लाॅकडाउन के दौरान लोगों के सामने वेब सीरीज का एक ऐसा गुलदस्ता पेश किया, जिसमें नर्म-नाजुक फूलों के स्थान पर कांटों की भरमार थी। कांटे भी ऐसे जिन्होंने लोगों  के दिलो-दिमाग को बुरी तरह लहूलुहान कर दिया। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो, जी5, सोनी लिव, डिज्नी हॉटस्टार, एमएक्स प्लेयर, एरोस नाउ, वूट और ऑल्ट बालाजी जैसी कंपनियों ने अपने प्लेटफाॅर्म पर थ्रिलर, सस्पेंस, सैक्स और क्राइम पर आधारित अनेक वेब सीरीज को एक के बाद एक रिलीज किया।


 


मोबाइल पर उपलब्ध सस्ते इंटरनेट का आनंद लेने वाले लोग तुरंत ही वेब सीरीज से जुड़ गए। लाॅकडाउन के दौर में  जब तमाम गतिविधियां ठप पड़ी थीं और लोग पूरी तरह फुर्सत में थे, उन्होंने इन वेब सीरीज का ‘रसास्वादन‘ किया और कच्ची बुद्धि के कुछ लोगों ने तो इन वेब सीरीज को हकीकत समझ लिया और अपराध का रास्ता भी पकड़ लिया। पिछले दिनों फरीदाबाद में काॅलेज छात्रा निकिता की दिन दिहाड़े हत्या करने वाला आरोपित तो पूछताछ में कबूल ही कर चुका है कि वेब सीरीज देखकर उसने हत्या का प्लान बनाया।
यह एक नए किस्म का खतरा है, जो धीरे-धीरे पूरे समाज को अपने आगोश में ले रहा है। मोबाइल में कई तरह के ऐप पर प्रदर्शित वेब सीरीज में कहानी के नाम पर क्रूरता दिखाई जा रही है। बदमाशों, बाहुबलियों का महिमामंडन कर लोगों के मन में उनकी एक हीरो वाली छवि पैदा की जा रही है। इन वेब सीरीज में गैंगवॉर के दौरान या राह चलते छोटी सी बात पर क्रूरता से हत्या करते हुए दर्शाया जाता है। विकीपीडिया के मुताबिक वेब सीरीज स्क्रिप्टेड या गैर-स्क्रिप्टेड ऑनलाइन वीडियो की एक श्रृंखला है, आमतौर पर एपिसोडिक रूप में, इंटरनेट और वेब टेलीविजन माध्यम के हिस्से पर जारी किया जाता है, जो पहली बार 1990 के दशक के अंत में उभरा और 2000 के दशक की शुरुआत में और अधिक चलन में  आ गया।
मीडिया से जुड़े लोगों का कहना है कि वेब सीरीज नए दौर का नया चलन है। अर्थात अब मनोरंजन के लिए सिनेमा और टेलीविजन ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि कुछ और भी चाहिए। मनोरंजन से जुड़ी हमारी दुनिया में यूं तो वेब सीरीज पिछले पांच वर्षों से चलन में हैं, लेकिन हाल के दिनों में वेब सीरीज का क्रेज कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है। जब कभी चर्चित और मोटी कमाई करने वाली वेब सीरीज का जिक्र किया जाता है, उनमें ‘सेक्रेड गेम्स‘ का जिक्र सबसे पहले होता है। नेटफ्लिक्स पर प्रदर्शित इस वेब सीरीज में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सैफ अली खान ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवाने द्वारा निर्देशित इस वेब सीरीज के हर किरदार को लोगों ने बेहद पसंद किया। ‘सेक्रेड गेम्स‘ का पहला सीजन जुलाई, 2018 मंे रिलीज हुआ था और इसे मिली जबरदस्त कामयाबी के बाद पिछले साल इसका दूसरा सीजन भी आया। 
‘सेक्रेड गेम्स‘ को मिली कामयाबी ने दूसरी फिल्म कंपनियों को एक नई राह दिखाई और जैसे एक होड़ सी मच गई। ज्यादातर कंपनियों ने क्राइम-थ्रिलर पर आधारित विषयों को चुना, तो ऑल्ट बालाजी जैसी कंपनियों ने सैक्स के सहारे अपनी जेबें भरने का प्रयास किया और इसमें वे किसी हद तक कामयाब भी रहे। हाल ही जब बॉलीवुड में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से ड्रग्स के इस्तेमाल पर चारों तरफ चर्चाएं हो रही थीं, तो इसी माहौल में एमएक्स प्लेयर ने अपने फ्री प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज ‘हाई‘ को लॉन्च किया, जिसमें ड्रग्स के कारोबार और उसके पीछे की कहानी को दर्शाया गया। एमएक्स की यह वेब सीरीज दिखाती है कि कैसे नशे के कारोबार से उसे यूज करने वाले ही नहीं बल्कि क्रिमिनल, सिस्टम, कॉर्पोरेट और बाकी के लोग जुड़े हुए हैं। सीरीज में मीडिया का एक ऐसा काला चेहरा दिखाया गया है जिसे शायद आज लोग देखना चाहते हैं। इसी दौर में जाने-माने फिल्मकार प्रकाश झा भी वेब सीरीज ‘आश्रम‘ लेकर आए, जिसमें बाॅबी देओल ने मुख्य भूमिका निभाई। इस सीरीज में धर्म के नाम पर होने वाले गोरखधंधे पर रोशनी डाली गई। साइबर अपराधों पर आधारित वेब सीरीज ‘जामताड़ा‘, पंकज त्रिपाठी की प्रमुख भूमिका वाली सीरीज ‘मिर्जापुर‘, दीपा मेहता द्वारा निर्देशित और हुमा कुरैशी अभिनीत ‘लैला‘ और ‘देहली क्राइम‘ जैसी वेब सीरीज ने भी दर्शकों के सामने एक नया संसार खड़ा करने का प्रयास किया।
इस सिलसिले मंे अब नया ट्रेंड यह है कि अलग-अलग प्लेटफाॅर्म पर अक्सर कोई वेब सीरीज एक्सक्लूसिव तौर पर लॉन्च की जाती है, ताकि लोगों में रुचि पैदा हो और उसे देखें। इसके लिए अलग-अलग ऐप का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है। जाहिर है कि ओटीटी पर वेब सीरीज और इसी तरह की दूसरी तमाम सामग्री देखने के लिए आपको अपनी जेब ढीली करनी होती है। लोगों के रुपए खर्च हो रहे हैं और कमाई इन वेब सीरीज वालों की हो रही है।
जाहिर है कि लोगों के मनोरंजन का जरिया बदल रहा है और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अब फिल्मों के साथ ही वेब सीरीज को भी मनोरंजन का बड़ा जरिया मान बैठी है। दूसरी तरफ यह भी सच्चाई है कि ओटीटी प्लेटफाॅर्म पर हलचल मचाने वाली वेब सीरीज को मनोरंजन के बाजार में अभी लंबा रास्ता तय करना है। इस राह में फूल भी होंगे और कांटे भी, पर हमें यानी दर्शकों को यह फैसला करना है कि क्या मनोरंजन की हमारी तलाश इतनी सस्ती हो गई है कि हम वेब सीरीज के नाम पर कुत्सित दिमाग वाले लोगों के चक्रव्यूह में फंसकर जाने-अनजाने अपराधों को बढ़ावा देने के भागीदार बन जाएं?


 


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