फेसबुक और इंस्टाग्राम पर टीका विरोधियों के विज्ञापनों पर रोक

जयपुर। फेसबुक ने कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कोरोना टीके का विरोध करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाने का फैसला किया है। लेकिन सामान्य यूजरों के पोस्ट पर रोक नहीं होगी। सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने टीका विरोधी विज्ञापनों पर रोक लगाने की घोषणा करते हुए एक ब्लॉग में लिखा है कि कोरोना महामारी ने दिखाया है कि स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए रोकथाम वाला बर्ताव कितना महत्वपूर्ण है। जर्मन पत्रिका श्पीगेल के अनुसार नए नियम फेसबुक के साथ ही इंस्टाग्राम पर भी लागू होंगे। हालांकि फेसबुक ने कहा है कि वह भविष्य में भी ऐसे विज्ञापनों की अनुमति देगा जो टीके के सिलसिले में सरकार के खास कदमों की आलोचना करते हैं। इस समय दुनिया भर में कोरोना महामारी के खिलाफ टीका बनाने पर काम चल रहा है।



फेसबुक ने एक दिन पहले ही अपनी साइट पर साजिश वाले सिद्धांतों के प्रचार खिलाफ कदम कदम उठाया था। बुधवार को प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार अपुष्ट सिद्धांतों में भरोसे से महामारी के खिलाफ टीका लेने की लोगों की तैयारी काफी कम हो सकती है। दुनिया के महत्वपूर्ण ऑनलाइन नेटवर्क पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि वह टीका विरोधियों को अपना संदेश फैलाने की सुविधा दे रहा है। फेसबुक ने कहा है कि वह अमेरिका में ऐसा अभियान चलाने की योजना बना रहा है जिसमें फ्लू के खिलाफ टीके का प्रचार किया जाएगा।


फेसबुक के नए नियम सिर्फ उन पोस्ट पर लागू होंगे जिनके लिए यूजर कंपनी को फीस चुकाते हैं। फीस देने के बाद ये पोस्ट ऐसे यूजरों तक भी पहुंचते हैं जो उस पेज को लाइक नहीं करते हैं।सामान्य यूजरों के पोस्ट इस नियम से प्रभावित नहीं होंगे। आम तौर पर फेसबुक पर ऐसे पोस्ट की भरमार रहती है जिनमें कांसपिरेसी थ्योरी का समर्थन और प्रचार किया जाता है। फेसबुक टीके के बारे में गलत सूचनाओं से फैक्ट चेक का संकेत देकर निबटता है और कुछ मामलों में उनके रीच को भी नियंत्रित करता है।


ब्रिटिश विज्ञान पत्रिका रॉयल सोसायटी ओपन साइंस में प्रकाशित स्टडी के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, स्पेन और मेक्सिको में सर्वे किया गया। इसके अनुसार हालांकि बहुमत लोग कोरोना वायरस को लेकर कंसपिरेसी थ्योरी को अस्वीकार करते हैं लेकिन लोगों का बड़ा हिस्सा उसमें किए जाने वाले दावों को सच मानता है। इस स्टडी के अनुसार सर्वे में शामिल होने वाले देशों में कोरोना महामारी पर सबसे प्रचलित कंसपिरेसी थ्योरी यह है कि नया वायरस जानबूझकर चीन के वुहान शहर की प्रयोगशाला में विकसित किया गया है।


लाखों की आबादी वाले चीन के वुहान शहर में ही इंसान में नए कोरोना वायरस का पता लगा था। रिसर्चरों का कहना है कि ब्रिटेन और अमेरिका में 22 से 23 प्रतिशत लोग इसके बारे में कंसपिरेसी थ्योरी पर भरोसा करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इसी वजह से इसे कोरोना वायरस के बदले चाइना वायरस कहा था और चुनाव प्रचार के दौरान वे अब भी इसे दोहरा रहे हैं।


इस स्टडी के लेखकों ने कंसपिरेसी थ्योरी में विश्वास और कोरोना महामारी के खिलाफ टीका लगाने में संशय के बीच संबंध पाया है। रिसर्च के सहलेखक सांडर फान डेय लिंडेन ने ये बात कही है। रिसर्चर इस नतीजे पर भी पहुंचे हैं कि सर्वे में भाग लेने वाले लोग जितना कंसपिरेसी थ्योरी पर भरोसा कर रहे थे भविष्य में आने वाला टीका लेने की उनकी तैयारी भी उसी अनुपात में कम थी। 


 


 


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