फेक टीआरपी के मामले में रिपब्लिक टीवी को अब सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद

मुंबई। फेक टीआरपी जुटाने के मामले में रिपब्लिक टीवी को अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की उम्मीद है, इसलिए रिपब्लिक के सीएफओ शिव सुंदरम ने मुंबई पुलिस से कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद ही पुलिस के सामने उपस्थित होंगे। मुंबई पुलिस ने गुरुवार को टीआरपी से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा करते हुए चार व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया था। शनिवार को पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया के मुख्य वित्तीय अधिकारी को तलब किया था, जो पेश होने में असमर्थता जताते हुए इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।



इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार करने के एक दिन बाद पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया के मुख्य वित्त अधिकारी शिव सुब्रमण्यम सुंदरम, वितरण विभाग के प्रमुख घनश्याम सिंह, दो विज्ञापन एजेंसियों और बॉक्स सिनेमा और फक्त मराठी के अकाउंटेंट को तलब किया था। हालांकि, सिर्फ विज्ञापन एजेंसियों के अधिकारी मैडिसन के प्रमुख सैम बलसारा और आईपीजी मीडिया ब्रांड्स के सीईओ शशि सिन्हा ही पूछताछ के लिए पुलिस मुख्यालय पहुंचे थे। उनसे आठ से अधिक घंटों तक पूछताछ की गई थी। वहीं, रिपब्लिक के सीएफओ शिव सुब्रमण्यम सुंदरम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जल्द सुनवाई की मांग की और मुंबई पुलिस के समन को भी चुनौती दी।


सुंदरम और घनश्याम सिंह ने मुंबई पुलिस से कहा था कि वे मुंबई से बाहर हैं। सुंदरम ने अपने पत्र में कहा कि वह फिलहाल मुंबई में नहीं है वह 14-15 अक्टूबर के बाद ही मुंबई में होंगे। इस पत्र में कहा गया, मैं आपके संज्ञान में यह लाना चाहता हूं कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की गई है और हमने जल्द सुनवाई का आग्रह किया है, जो अगले हफ्ते हो सकती है। यह मामला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सूचीबद्ध होने वाला है। मैं आपसे आग्रह करता हूं जहां तक रिपब्लिक टीवी और इसके कर्मचारियों का सवाल है, जांच में और आगे नहीं बढ़ा जाए। हम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप ही जांच में शामिल होंगे।’


सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वेज की अगुवाई में जांचकर्ता टीम ने बलसारा और सिन्हा से बीते दो सालों में उनके क्लाइंट का पूरा विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा। उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें उनके क्लाइंट्स का पूरा ब्योरा सौंपने को कहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन एजेंसियों के जरिये कितने न्यूज चैनलों को कितने विज्ञापन दिए गए? हमने उनसे उनके जरिये हुए वित्तीय लेनदेन और उनके नामों का विवरण भी मांगा है।’ उन्होंने कहा, ‘जब हमने दोनों एजेंसियों से किसी निश्चित चैनल के लिए विज्ञापन की दरें तय करने का पैमाना पूछा तो उन्होंने पुष्टि की कि टीआरपी ही मुख्य पैमाना है, जिसके आधार पर चैनलों को विज्ञापन दिए जाते हैं और उसी के अनुसार विज्ञापन की दरें तय होती हैं।’


बता दें कि मुंबई पुलिस ने गुरुवार को टीआरपी से छेड़छाड़ करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ करने का दावा करते हुए इस मामले में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। गौरतलब है कि टीआरपी से यह पता चलता है कि कौन-सा टीवी कार्यक्रम सबसे ज्यादा देखा गया। इससे दर्शकों की पसंद और किसी चैनल की लोकप्रियता का भी पता चलता है।गोपनीय तरीके से कुछ घरों में टीवी चैनल के दर्शकों के आधार पर टीआरपी की गणना की जाती थी। देश में ब्रॉडकास्ट ऑडिएंस रिसर्च कॉउंसिल (बार्क) टीवी चैनलों के लिए साप्ताहिक रेटिंग जारी करता है। बार्क टीवी के दर्शकों की संख्या बताने के लिए सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध प्रणाली के गठन और निगरानी का काम करता है और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के दिशानिर्देशों से बंधा होता है। टीआरपी को मापने के लिए मुंबई में दो हजार बार-ओ- मीटर (BAR-o-meters) लगाए गए हैं। बार्क ने ‘हंसा’नामक एजेंसी को इन मीटर पर नजर रखने का ठेका दिया था, जहां से इस कथित टीआरपी छेड़छाड़ मामले की शुरुआत हुई।


गुरुवार को मुंबई पुलिस ने इस मामले में चार लोगों विशाल भंडारी, बोम्पल्ली राव, बॉक्स सिनेमा के मालिक नारायण शर्मा और फक्त मराठी चैनल के मालिक शिरीष शेट्टी को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनसे पूछताछ के दौरान पुलिस को हंसा रिसर्च ग्रुप के दो और पूर्व कर्मचारियों की कथित भागीदारी का पता चला। इनकी पहचान दिनेश विश्वकर्मा और विनय त्रिपाठी के रूप में हुई है।अधिकारी ने कहा, ‘विश्वकर्मा उस समय भंडारी का बॉस था। भंडारी मुंबई के उन 1,800 में से 83 घरों का प्रभारी था, जहां सेटटॉप बॉक्स के साथ टीआरपी मापने के लिए बार-ओ-मीटर लगाए गए थे। हमें पता चला कि टीआरपी बढ़ाने के लिए इन घरों में चैनलों को चलाकर रखे जाने के लिए लोगों को 400 रुपये की पेशकश देने में दोनों की समान रूप से भागीदारी है।’उन्होंने कहा कि इन 83 घरों के लोगों में से हमने 38 से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए हैं और इन लोगों ने पुष्टि की है कि इन्हें चैनलों को निश्चित घंटों के लिए चलाकर रखे जाने के लिए गूगल पे से भुगतान किया गया था।जांचकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए छह राज्यों में छह टीमों को भेजा है। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि उन्होंने चैनलों और विज्ञापन एजेंसियों के बैंक स्टेटमेंट की जांच में मदद के लिए जीएसटी विभाग, आयकर विभाग और आर्थिक अपराध शाखा से संपर्क किया है।


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