अब देश में कम्युनल हार्मोनी की बात करना भी एक गुनाह है शायद!

एक ऐसी गैंग निरंतर सक्रिय है, जिसने सोशल मीडिया के करीब-करीब हर प्लेटफाॅर्म को नफरत के जहर से सराबोर कर दिया है। इस जहर का असर इतना जबरदस्त है कि इसकी आंच में तमाम रिश्ते-नाते जलकर राख हो गए हैं और दोस्ती और मुहब्बत की न जाने कितनी नदियों को इस जहर ने सुखा दिया है। ये ऐसे लोग हैं, जो यह स्थापित करने की कोशिश में हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अब एक सिर्फ एक ही रिश्ता हो सकता है- नफरत का रिश्ता। इन लोगों ने सालों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब को दफन कर दिया है और उस जमीन पर नफरत के ऐसे कांटे उगा दिए हैं, जो निरंतर हमारी और आपकी अंतरात्मा को लहूलुहान कर रहे हैं।


टाटा समूह के स्वदेशी ब्रांड तनिष्क के इस विज्ञापन पर जरा गौर कीजिए - एक आधुनिक और खूबसूरत सा घर, जिसमें पारंपरिक साड़ी पहनी हुई युवती की गोद भराई के उत्सव की तैयारी हो रही है। जाहिर है कि घर में चारों तरफ खुशी का माहौल है। इस महिला के साथ उसकी उम्रदराज सास भी दिख रही हैं जो कि सलवार-दुपट्टा पहने हुए हैं। इस दृश्य को देखकर दर्शक तुरंत समझ जाते हैं कि यह एक मुस्लिम परिवार है। खुशियों के माहौल से अभिभूत युवती अपनी सास से कहती है- यह रस्म तो आपके घर में होती भी नहीं है! इस पर सास जवाब देती हैं - मगर बिटिया को खुश रखने की रस्म तो हर घर में होती है! इसी गोद भराई की रस्म के दौरान ज्वैलरी का विज्ञापन होता है।



साधारण तौर पर देखें, तो इस विज्ञापन में कुछ भी गलत नजर नहीं आता। लेकिन कट्टरपंथियों के चश्मे से नजर डालें, तो तनिष्क का यह विज्ञापन ‘लव जिहाद' को बढ़ावा देता है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस विज्ञापन की आलोचना की और आरोप लगाया कि यह विज्ञापन एक साजिश के तहत बनाया और दिखाया गया है। दरअसल ‘लव जिहाद' जैसा शब्द हाल के दौर का सबसे चर्चित और सबसे बदनाम शब्द है। यह मुस्लिम-विरोधी विचारधारा वाले कुछ लोगों द्वारा इजाद की गई शब्दावली है, जिससे वो लोग अंतर-धार्मिक विवाहों को निशाना बनाते हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम पुरुष एक साजिश के तहत हिन्दू महिलाओं को अपने प्रेम में फंसा कर उनसे विवाह करते हैं और इस तरह वे अपने एक खास धार्मिक अभियान को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


लव जिहाद का जिक्र आते ही कुछ मुट्ठीभर लोग सोशल मीडिया पर तनिष्क के खिलाफ अभियान छेड़ देते हैं और देखते ही देखते मामला इतना बढ़ जाता है कि तनिष्क कंपनी के मालिक टाटा समूह को यह विज्ञापन वापस लेने का फैसला करना पड़ता है। विवाद के बीच तनिष्क ने ट्विटर पर एक मैसेज शेयर किया, जिसमें लिखा- ‘‘इस विज्ञापन के पीछे हमारा विचार यह था कि अलग-अलग जीवन जीने वाले लोग, स्थानीय समुदाय और परिवार साथ आएं और हमारी एकता का जश्न मनाएं। लेकिन इस विज्ञापन फिल्म को लेकर काफी गंभीर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जो कि इसके लक्ष्य के विपरीत हैं। हमें दुख है कि इससे लोगों की भावनाओं को चोट पहुंची है और हम अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और स्टोर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये विज्ञापन हटा रहे हैं।‘


यह घटना साफ तौर पर संदेश देती है कि अब देश में कम्युनल हार्मोनी की बात करना भी गुनाह है। यह घटना हमें बताती है कि जिस तरह गली-मुहल्लों में गुंडों और अपराधियों के गिरोह सक्रिय होते हैं, ठीक उसी तरह अब सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी संगठित अपराधियों के गुट लगातार सक्रिय हैं, जो अपनी गुंडई के बल पर यह निर्धारित करते हैं कि देश के लोग कौन-सा विज्ञापन देखें और कौन-सा नहीं। जिस तरह इस विज्ञापन पर बवाल मचा, उससे ऐसा आभास होता है कि हिंदू और मुस्लिम परिवारों में अब किसी किस्म के रिश्ते की बात सोचना भी बहुत बड़ा गुनाह है। दरअसल सोशल मीडिया पर गुंडा तत्वों की एक ऐसी गैंग निरंतर आंखें गड़ाए रहती है जो यह सोचती है कि इस देश के सवा अरब लोगों की तकदीर का फैसला करने का हक सिर्फ और सिर्फ उसे ही है। यह गैंग टाटा समूह से सवाल करती है कि आप मुस्लिम परिवार में हिंदू बहू को क्यों दिखा रहे हैं और इसे बढ़ावा क्यों दे रहे हैं? आप अपने विज्ञापन में हिंदू घर में मुस्लिम बहू को क्यों नहीं दिखाते हैं? ऐसा लगता है कि आप लव जिहाद को बढ़ावा देना चाहते हैं।


यह ऐसी गैंग है, जिसने सोशल मीडिया के करीब-करीब हर प्लेटफॉर्म को नफरत के जहर से सराबोर कर दिया है। इस जहर का असर इतना जबरदस्त है कि इसकी आंच में तमाम रिश्ते-नाते जलकर राख हो गए हैं और दोस्ती और मुहब्बत की न जाने कितनी नदियों को इस जहर ने सुखा दिया है। ये ऐसे लोग हैं, जो यह स्थापित करने की कोशिश में हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अब एक सिर्फ एक ही रिश्ता हो सकता है- नफरत का रिश्ता। इन लोगों ने सालों पुरानी गंगा-जमुनी तहजीब को दफन कर दिया है और उस जमीन पर नफरत के ऐसे कांटे उगा दिए हैं, जो निरंतर हमारी और आपकी अंतरात्मा को लहूलुहान कर रहे हैं।


सोशल मीडिया पर नफरत की फसल लहलहाने वाले लोग इस बात को अनदेखा कर गए कि तनिष्क का विज्ञापन यह भी दिखाता है कि एक लड़की जो शादी के बाद दूसरे मजहब के परिवार में जाती है, वहां भी वह अपनी पहचान कायम रखती है। मुस्लिम परिवार की बहू होने के बावजूद यह लड़की आम हिंदू महिलाओं की तरह साड़ी पहनती है, उसके हाथों में कंगन खनकते हैं और माथे पर बड़ी-सी बिंदिया चमकती नजर आती है। नैतिकता के ठेकेदारों को ऐसी बातें नजर भी नहीं आतीं, क्योंकि ऐसी बातों से उनका मकसद भी तो हल नहीं होता। उनका असली मकसद तो सांप्रदायीकरण की राजनीति करने के साथ इस मुल्क के अमन और चैन को बर्बाद करना है। उनका मकसद तो इस मुल्क की वर्षों पुरानी दोस्ती और मुहब्बत की परंपरा को खत्म करना है। उनकी निगाहें तो बड़े कॉर्पोरेट घरानों से रंगदारी वसूल करने पर हैं, उनका इरादा तो नफरत और बंटवारे की आग पर अपनी रोटियां सेकना है।


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