पेटीएम के सीईओ ने कहा- गूगल ने अपनी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए हमसे भेदभाव किया


नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट और फाइनेंशियल सर्विस ऐप पेटीएम के सीईओ विजयशेखर शर्मा ने साफ-साफ कहा है कि गूगल ने अपनी सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पेटीएम के साथ भेदभाव किया और गूगल ने पेटीएम के खिलाफ अपनी सुपर पावर का इस्तेमाल करने का प्रयास भी किया। उन्होंने कहा  कि गूगल के पास अपना एक भुगतान ऐप भी है। इसलिए अपनी सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए पेटीएम के साथ भेदभाव किया गया। गौरतलब है कि गूगल ने 19 सितंबर को पेटीएम को प्लेस्टोर से हटा दिया था। हालांकि, 30 करोड़ से अधिक यूजर और 70 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन रोज करने वाले ऐप की कुछ घंटों में ही प्लेस्टोर पर वापसी भी हो गई। इसी घटना के संदर्भ में दैनिक भास्कर के रिपोर्टर धर्मेंद्रसिंह भदौरिया के साथ एक इंटरव्यू में विजयशेखर शर्मा ने कहा कि उन्हें जानबूझ कर टार्गेट किया गया। इस इंटरव्यू को दैनिक भास्कर ने 26 सितंबर के अंक में  प्रकाशित किया है।



सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत में ऐप का बिजनेस वाली कंपनियों को यह अवश्य समझ लेना चाहिए कि जब उनका बिजनेस बड़ा होगा, तब वे आगे जाकर गूगल आदि टेक्नो जाइंट कंपनियों से अवश्य परेशान होंगे। उन्होंने कहा कि पेटीएम ऐप को गूगल द्वारा विशेष रूप से निशाना बनाया गया। ‘मुझे तो यह समझ में नहीं आता कि किस पॉलिसी के तहत उन्हें ऐसा लगा कि यूपीआई कैश बैक देने का जो हमारा प्रोग्राम है, वह गैम्बलिंग है। गैम्बलिंग बता कर फाइनेंशियल ऐप की विश्वसनीयता को गिरा दिया। हमारे ऊपर लगे यह गलत और झूठे आरोप हैं। हमें इस बात की कोई भी वार्निंग नहीं दी कि हम ऐप हटा रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण, दुर्भावनावश, बिजनेस पर अटैक कह सकते हैं।‘
इस सवाल के जवाब में कि गूगल की क्या दुर्भावना हो सकती है, विजयशेखर शर्मा ने कहा, ‘सबसे बड़ी बात क्या है कि उनके ऐप में भी यही सब चीजें चल रही होती हैं। उन्होंने जो ई-मेल भेजा उसमें उन्होंने हमें लिखकर दिया कि आप जो भुगतान करते हो उसके बदले में स्टीकर मिलता है। अब देखिए कि पेमेंट का ऐप है, तो पेमेंट नहीं करेगा तो क्या करेगा? यह कैसे जुआ हो सकता है? ऐसा नहीं है कि हमने यह अभी शुरू किया है या नया है। हम कैश बैक देते रहे हैं। हमने भी जैसे गूगल पे में स्टीकर आते हैं, वैसे ही दिए हैं।‘
उन्होंने  कहा, ‘हम हर दिन लाखों ग्राहक जोड़ते हैं, ऐप से हटने से नए कस्टमर आने बंद हो गए। बहुत सारे हमारे ग्राहक भ्रमित हो गए। किसी ने अफवाह चला दी कि हमारा ऐप निकाल दिया है और पैसे निकाल लो। इससे समस्या और बड़ी हो गई। जो कंपनियां अपना बिजनेस मॉडल ऐप के ऊपर चलाती हैं, उनको यह समझ लेना चाहिए कि आप अपना व्यवसाय भारत के नियम कानून के हिसाब से कर रहे हैं तो उनकी नजर में यह पर्याप्त नहीं हैं। ये हमारे देश के सुपर रेग्युलेटर हो गए हैं। ये बड़ी टेक जाॅइंट कंपनियां बताएंगी कि यहां का बिजनेस कैसे चलेगा? यही सबसे बड़ी समस्या है।
यह पूछने पर कि क्या आपको लगता है कि भारत को एक ऐसी संस्था की जरूरत है जो सही मायने में नई अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप इकोसिस्टम का समर्थन करती हो? उन्होंने कहा, ‘यह बहुत जरूरी बात है। हमारी देश में कार्य करने वाली ऐसी संस्थाएं जो विदेशी कंपनियों के माऊथपीस बने हुए हैं वो हमारे लिए ज्यादा बड़ी समस्या है। इस देश को ऐसे संगठन की आवश्यकता है जो भारतीय टेक्नॉलाजी कंपनियों को रिप्रजेंट करे। संगठन में शक्ति है और सरकार में हमारा भरोसा है। जब हम साथ में मिलकर आएंगे तब देश ही नहीं दुनिया भी बदलती है। जब एक व्यक्ति के साथ ऐसा हो रहा है जो सबके साथ होना संभव है। आप अगर यूट्यूब या फेसबुक यूज नहीं करोंगे तो ऐ पैसा कैसे बनाएंगे? हम इस देश का विकास चाहते हैं देश में निवेश चाहते हैं। ये कंपनियां देश से पैसा ले जाती हैं निवेश कहां करती हैं?'
उन्होंने कहा, ‘बड़ी टेक्नॉलाजी कंपनियां जैसे गूगल और फेसबुक देश से 30 से 35 हजार करोड़ रुपए का राजस्व कमाती हैं और टैक्स देती हैं शून्य। भारत सरकार ने एक टैक्स का प्रयास किया जिसको गूगल टैक्स बोलते हैं। गूगल उसकी भी लड़ाई लड़ रहा है कि टैक्स न लगाया जाए। ये कंपनियां देश के बिजनेस के ऊपर अपनी धौंस जमाती हैं। इन कंपनियों को देश में पूरा-पूरा टैक्स जमा कराना चाहिए। नौकरी अमेरिका में देते हैं, ये लोग ब्रेन ड्रेन का कारण हैं, हमारे यहां से पैसा ले जाने का कारण हैं। बिजनेस पर धौंस जमा कर यह जताते हैं कि तुम्हारा भविष्य हम तय करते हैं तुम कुछ नहीं हो।'


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