धीमे बोलने से कोविड-19 के प्रसार को कर सकते हैं कम, नई रिसर्च में दावा

क्या आवाज से भी फैलता है कोरोना वायरस? क्या ध्वनि तरंगों और कोरोना वायरस में भी कोई संबंध है? क्या धीमी आवाज में बोलने से संक्रमण के फैलने के खतरे को कम किया जा सकता है? क्या कहती है ताजा रिसर्च?


नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने हाल ही में जब कहा था कि तेज बोलने से भी कोरोना वायरस फैलता है, तो सभी विधायक हंस पड़े। लेकिन एक नई रिसर्च यह संकेत दे रही है कि यह मजाक की बात नहीं है। वाकई अगर हम धीमे आवाज में बात करें, तो संक्रमण के फैलने के खतरे को कम किया जा सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में हुई इस रिसर्च में सामने आया है कि धीमे बोलने से कोविड-19 के प्रसार को कम किया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इसे देखते हुए अस्पताल और रेस्तरां जैसी ज्यादा जोखिम वाली बंद जगहों के अंदर अगर ज्यादा शांत इलाके बना दिए जाएं तो संक्रमण के फैलने के जोखिम को कम किया जा सकता है।



इन शोधकर्ताओं का कहना है कि आवाज के औसत स्तरों में अगर छह डेसिबेल की कमी की जाए, तो उससे वैसा ही असर होगा जैसा किसी कमरे की वेंटिलेशन को दोगुना करने से होता है। अध्ययन में पाया गया कि आवाज 35 डेसिबेल बढ़ा देने से हवा में मौजूद वायरस वाले कण 50 गुना ज्यादा तेज दर से फैलते हैं। 35 डेसिबेल यानी फुसफुसाने और चिल्लाने के बीच का फासला। बोलते समय मुंह से बहुत ही छोटी बूंदें निकलती हैं जिनके वाष्पि बन कर उड़ जाने के बाद हवा में एयरोसोल कण रह जाते हैं जो इतने बड़े होते हैं कि उनमें वायरस रह सके।


विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही मान चुका है कि समूह में गाते समय, या रेस्तरां में खाते समय, या व्यायाम की क्लासों में एयरोसोल के जरिए कोरोना वायरस का प्रसार हो सकता है। इस देखते हुए जुलाई में संगठन ने अपने दिशा निर्देश भी बदले थे। आम तौर पर बातचीत के दौरान आवाज का स्तर 10 डेसिबेल से थोड़ा ज्यादा होता है, जबकि रेस्तरां में आस पास की आवाज 70 डेसिबेल के करीब होती है। 


प्रमुख शोधकरता विलियम रिस्टनपार्ट का कहना है कि सभी एयरोसोल से प्रसार का जोखिम सभी तरह की बंद जगहों पर बराबर नहीं होता। एक शांत लेकिन भरी हुई कक्षा एक बिना भीड़ भाड़ वाले कैराओके बार से कहीं कम खतरनाक है जहां बैठने वाले दूर तो बैठे हैं लेकिन ऊंचे संगीत के साथ गा रहे हैं और बातें कर रहे हैं। 


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