मुशायरों के पहले सुपर स्टार थे राहत इंदौरी

जयपुर। हरदिल अजीज शायर राहत इंदौरी को मुशायरों का सुपर स्टार माना जाता था यानी मुशायरों की दुनिया में उनका वही स्थान था जो फिल्मों की दुनिया में कभी राजेश खन्ना का था। एक से बढ़कर एक स्टार शायर मुशायरों के मंच पर आते रहे, लेकिन राहत इंदौरी को जो दर्जा मिला, वह और किसी को नसीब नहीं हुआ। कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि आजादी के बाद मुशायरों के इतिहास को ‘राहत पूर्व'‘ और ‘राहत पश्चात' इन दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।



राहत इंदौरी ने ही मुशायरों को परफाॅर्मिंग आर्ट की ऊंचाई तक पहुंचाया। पहले भी मुशायरे होते थे, लेकिन मंच पर शायर किस अंदाज में गजलें पेश करे, या किस अंदाज से शेरों की अदायगी करें, इस पर ध्यान नहीं दिया जाता था। राहत साहब ने मुशायरों में एक नए अंदाज और एक नए आगाज का दाखिला कराया। उन्होंने मुशायरे और अदब के बीच एक विभाजन रेखा खींची। उन्होंने ही सिखाया कि मुशायरों में कामयाब होने के लिए सिर्फ अच्छी शायरी का होना ही काफी नहीं, बल्कि उसे पेश करने का सलीका भी जरूरी है।


पिछले दिनों कपिल शर्मा शो के एक एपिसोड में राहत इंदौरी ने शिरकत की थी। उस रोज शो का मिजाज एक दम से बदला नजर आया। उनके साथ प्रोफेसर अशोक चक्रधर भी शो में नजर आए। इस दौरान दोनों ने प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ से जुड़ी हुई बातें शेयर कीं। कपिल शर्मा ने शायर से पूछा कि वे इस उम्र में भी रोमांटिक शायरियां कैसे लिख लेते हैं। उनकी रोमांटिक इंस्पिरेशन क्या है?


जवाब में राहत ने कहा- ''आदमी बूढ़ा दिमाग से होता है, दिल से नहीं।'' इसके अलावा कपिल शर्मा ने राहत इंदौरी से पूछा कि क्या जिस तरह आपकी एक शायरी की लाइन है- ''आसमां लाए हो, ले लाओ, जमीं पर रख दो, क्या आपकी वाइफ भी पूछती हैं कैश लाए हो, तो कपबोर्ड में रख दो।'' राहत कपिल के मजाक और हाजिरजवाबी से प्रभावित हुए थे।


इस दौरान राहत साहब ने शो पर बहुत सी गजलें सुनाई थीं। वे लोगों के बीच अपनी शायरी करने के अंदाज के लिए मशहूर हैं। वे सरकार पर सीधा वार करते हैं। उनकी शायरी में प्यार-मोहब्बत, हुस्न आशिकी से अलग जमीनी मसलों का भी खूब जिक्र होता है। उनके जाने के बाद सोशल मीडिया पर राहत साहब को श्रद्धांजलि देने वालों की झड़ी लग गई है।


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