हमारी जिंदगी और हमारी यादों का सबसे खूबसूरत हिस्सा हैं लता के गाने

‘संगीत मेरी जिंदगी और मेरा भगवान है। मेरी प्रार्थना भी संगीत है। यह मेरे लिए माता और पिता जैसे है, और आज मैं जहां हूं, उसके लिए मैं इस संगीत का आभार मानती हूं। हर जगह लोग मुझे इसकी वजह से पहचानते हैं। मगर जो सबसे बड़ी चीज मिली है, वह है प्रेम।.....अगर मैं हजार वर्ष भी जीवित रहूंगी, तो भी मैं वह कृतज्ञता वापस नहीं कर सकती, जिसका मुझे अहसास है। लोगों ने मुझ पर अपार प्रेम और दुआएं बरसाई हैं। प्रेम पाना ही सबसे बड़ी चीज है। इससे ज्यादा आप और क्या अभिलाषा कर सकते हैं?'



ये हैं लता मंगेशकर के वे जज्बात, जो उन्होंने नसरीन मुन्नी कबीर के साथ बातचीत के दौरान व्यक्त किए हैं। पुस्तक ‘अपने खुद के शब्दों में लता मंगेशकर‘ दरअसल लता मंगेशकर और नसरीन मुन्नी कबीर के बीच दिलचस्प बातचीत की वृहद श्रंखला है, जो देश की सबसे ज्यादा प्रतिभासंपन्न गायिका के जीवन के अनेक नए पहलुओं से हमें परिचित कराती है। फिल्म संगीत को देश-दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाने वाली हस्ती लता मंगेशकर पर पहली ऐसी अनोखी किताब, जो उनके द्वारा आधिकारिक तौर से स्वीकृत की गई है। इसमें उनके जीवन के हर पहलू को उन्हीं के शब्दों में बयान किया गया है। किताब का समापन ऊपर व्यक्त किए गए लता मंगेशकर के जज्बात के साथ ही होता है।


बचपन से लेकर काबिल मुकाम तक के सफर से जुड़े करीब 150 दुर्लभ चित्र पुस्तक को बहुत खास बनाते हैं। करीब 150 पेजों में लता का इंटरव्यू सिमटा है और फिर सज्जाद हुसैन, तलत महमूद, खय्याम, नौशाद, गुलजार, जावेद अख्तर, यश चोपड़ा, दिलीप कुमार, वहीदा रहमान और जया बच्चन आदि अनेक फिल्मी हस्तियों के विचार भी इस किताब में शामिल किए गए हैं, जो हमें यह समझने में मदद करते हैं कि आखिर क्यों जमाना लता मंगेशकर की महानता की मिसाल देते नहीं थकता। लता के बारे में दिलीप कुमार के जज्बात पर जरा गौर कीजिए- ‘लता मंगेशकर के गाने हमारी जिंदगी और हमारी यादों का एक हिस्सा हैं। वह आवाज, वे शब्द, जो वे गाती हैं, वह माहौल, वेदना, खुशी, जुदाई का दर्द। इस कलाकार की खूबसूरत आवाज सबके हृदय में अंकित हो गई है। आपके दिल में उनकी छाप है, मेरे दिल में उनकी छाप है। ऐसे कई अनगिनत लोग हैं, जिनके दिल में लता की छाप है।'


लता के बारे में एक बार जावेद अख्तर ने लिखा था- ‘अगर आप सारे जहान की खुशबू लेंगे, संपूर्ण चांद की शीतलता, और विश्व का संपूर्ण शहद, और इन सबको एक साथ रखेंगे, तब भी लता जैसी आवाज को नहीं रचा जा सकता है।'


अद्भुत गायन शैली, विशुद्ध आवाज और शब्दों पर पकड़ की खूबसूरती- शायद इन्हीं तमाम कारणों से तकरीबन छह दशकों तक भारतीय फिल्म संगीत में उनका एकछत्र राज रहा है। प्रसिद्धि के शीर्ष पर पहुंचने के बावजूद आज भी लता एक नितांत निजी इंसान हैं, जिन्होंने तड़क-भड़क और चकाचैंध से हमेशा ही दूरी बनाए रखी है। जिनकी आवाज ने असंख्य लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाई हुई है, उन्हीं लता मंगेशकर के साथ बातचीत करते हुए नसरीन मुन्नी कबीर ने न सिर्फ गुजरे दौर के सिने संगीत के इतिहास पर गहरी नजर डालने की कोशिश की है, बल्कि सत्यपरक और तथ्यात्मक जानकारी को कुछ इस अंदाज में प्रस्तुत किया है कि उनमें अफवाहों और काल्पनिक किस्सों के लिए कोई जगह बाकी नहीं रह जाती। यूं तो लता पर पहले भी बहुत किताबें आ चुकी हैं, लेकिन इस किताब में लता के जीवन के हर पहलू केे बारे में उन्हीं से उनके ही शब्दों में सुनना एक दिलचस्प अनुभव है।


नसरीन ने अपने जीवन का अधिकांश समय, लंदन (यू.के.) में बिताया है, 1969 में उन्हें, भारतीय सिनेमा को यू.के. में बढ़ावा देने के लिए, पहले ‘एशियन वुमंस अचीवमेंट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। वे 6 वर्ष तक, ‘ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट’ की अध्यक्ष भी रही हैं। नसरीन की यह किताब कुछ साल पहले अंग्रेजी में आई थी और अब इसका हिंदी अनुवाद प्रकाशित हुआ है। लेखक-पत्रकार डी. श्याम कुमार ने अनुवाद के दौरान लता के मूड और मिजाज को बड़ी खूबसूरती से पकड़ा है और यही खूबी इस किताब को दूसरी तमाम किताबों से अलग खड़ा करती है।


‘अपने खुद के शब्दों में लता मंगेशकर‘


लेखक- नसरीन मुन्नी कबीर/ अनुवादक- डी. श्याम कुमार


प्रकाशक- नियोगी बुक्स, ब्लाॅक डी, बिल्डिंग नंबर 77


ओखला औद्योगिक क्षेत्र फेज -1


नई दिल्ली - 110020


पृष्ठ- 230/ मूल्य- 750 रुपए


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