हांगकांग में सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया टाइकून को पुलिस ने किया गिरफ्तार

नई दिल्ली। हांगकांग में लोकतंत्र का समर्थन करने और सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया टाइकून जिम्मी लाई को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिम्मी लाई ‘एप्पल डेली‘ और ‘नेक्स्ट मैगजीन‘ नाम के दो प्रकाशनों के मालिक हैं और अपने इन प्रकाशनों में वे अक्सर चीन सरकार की आलोचना करते रहे हैं। हाल में हांगकांग में चीन द्वारा लागू किए गए नए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत सोमवार को लोकत्रंत्र के हिमायती मीडिया टाइकून जिम्मी लाई के अखबार के दफ्तरों पर पुलिस ने छापे मारे और लाई समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया।   



हांगकांग पुलिस की कार्रवाई  लाई के 'नेक्स्ट मीडिया' पब्लिशिंग समूह पर केंद्रित थी और नए कानून के लागू होने के बाद आवाज उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की अगली कड़ी थी। लाई के करीबी मार्क साइमन ने एएफपी को बताया, "पुलिस ने उन्हें उनके घर से लगभग सुबह सात बजे के आस-पास गिरफ्तार किया।" पुलिस ने एक बयान में कहा कि सात लोगों को विदेशी ताकतों के साथ सांठ-गांठ करने संदेह में हिरासत में लिया गया। ये राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत अपराधों में से एक है। इन सातों पर धोखाधड़ी के भी आरोप लगाए गए हैं। लाई के 'एप्पल डेली' अखबार में काम करने वाले पत्रकारों ने पुलिस की छापेमारी की नाटकीय तस्वीरें फेसबुक पर लगाईं। एक वीडियो में अखबार के मुख्य संपादक लॉ वाई-क्वॉन्ग को पुलिस अफसरों से वारंट मांगते हुए देखा जा सकता है। लॉ पुलिस से कह रहे हैं, "अपने सहकर्मियों से कहो कि जब तक हमारे वकील वारंट को ठीक से देख नहीं लेते तब तक वो किसी चीज को हाथ ना लगाएं।"


पुलिस ने एप्पल के कर्मचारियों को अपनी सीटें छोड़ कर एक कतार में खड़े हो जाने के लिए कहा ताकि पुलिस उनकी पहचान कर सके। दूसरी तरफ पूरे न्यूजरूम में पुलिस ने तलाशी ली। कुछ देर बाद 72 वर्षीय लाई भी हथकड़ियों में और पुलिस अफसरों से घिरे हुए नजर आए। एक बयान में पुलिस ने कहा कि तलाशी एक अदालती वारंट के तहत ली गई थी जिसे कर्मचारियों को दिखाया भी गया था।


लाई के 'एप्पल डेली' और 'नेक्स्ट मैगजीन' मुखर रूप से लोकतंत्र के समर्थक और बीजिंग के आलोचक हैं। हांगकांग में कम ही लोगों को बीजिंग व्यक्तिगत रूप से इतनी कटुता से देखता है, जितना कि लाई को। शहर के कई नागरिकों के लिए वो एक असंभाव्य हीरो हैं। वो एक निर्भीक किस्म के टैब्लॉयड मालिक हैं जिन्होंने अपना व्यापार खुद खड़ा किया है और वो बीजिंग की आलोचना करने वाले एकमात्र टाइकून हैं। लेकिन चीन का सरकारी मीडिया उन्हें "गद्दार", पिछले साल के प्रदर्शों के पीछे का सबसे "काला हाथ" और एक नए "चार लोगों के गिरोह" का सरगना बताता है जो मातृभूमि को नुक्सान पहुंचाने के लिए विदेशी ताकतों के साथ मिल कर साजिश कर रहे हैं। लाई पिछले साल जब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पेयो और उप राष्ट्रपति माइक पेंस से मिले तब तो उनके खिलाफ सरकारी मीडिया में अभियान और भी तेज हो गया।


उनका जीवन गरीबी से अमीरी की एक कहानी है। वो 12 साल की उम्र में कम्युनिस्ट चीन से भागकर हांगकांग आए थे, जहां उन्होंने ने फैक्ट्रियों में मेहनत की, खुद अंग्रेजी सीखी और धीरे धीरे गिओर्दानो नामक एक कपड़ों के एक सफल साम्राज्य की स्थापना की। 1989 में बीजिंग में तियाननमेन चौराहे की घटना ने उन्हें राजनीतिक बना दिया और वो चीन की आलोचना करने वाले हांगकांग के चंद बड़े उद्योगपतियों में शामिल हो गए। जब अधिकारियों ने मुख्य भू-भाग में उनके कपड़ा साम्राज्य को बंद करना शुरू कर दिया तो उन्होंने उसे बेच दिया और उग्र टैब्लॉयड छापने शुरू कर दिए। एएफपी से बातचीत में उन्होंने नए सुरक्षा कानून को "हांगकांग के लिए मौत की घंटी" बताया था और कहा था कि उन्हें डर है कि अधिकारी उनके पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।


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