गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के नाटक 'डाकघर' में एक अकेले लड़के की दास्तान 

 


जयपुर। रवींद्रनाथ टैगोर की 79वीं पुण्यतिथि पर, जवाहर कला केंद्र (जेकेके) के फेसबुक पेज पर शुक्रवार को प्रसिद्ध नाटक 'डाकघर' प्रदर्शित किया गया। रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन संकेत जैन ने किया है। 20वीं सदी के ग्रामीण बंगाल के परिवेश पर आधारित, 'डाकघर' की कहानी अनाथ लड़के अमल के इर्द-गिर्द घुमती है, जो कि एक लाइलाज  बीमारी से ग्रस्त है। बीमारी के कारण अमल अपने कमरे से बाहर जाने में असमर्थ होता है। इसी के चलते अमल अपने कमरे की खिड़की के पास से गुजरने वालों से बातें करने लगता है। वह स्वयं की पीड़ा भुलाकर खिड़की के पास से गुजरने वाले स्थानीय दही विक्रेता, शहर का चौकीदार और फूल बेचने वाली लड़की सुधा, जो कि अमल के लिए प्रतिदिन फूल लाती है, सभी से बातें करने लगता है।



इसी बीच अमल को यह जानकर प्रसन्नता होती है कि उसके पड़ोस में डाकघर खुलवाया जा रहा है। अमल की इच्छा होती है कि राजा उसे भी पत्र लिखे। नाटक आगे बढ़ता है और गांव के मुखिया को अमल की इस इच्छा का पता चलता है तो वह अमल को बेवकूफ बनाने के लिए राजा के वैद्य का लिखा एक फर्जी पत्र अमल को दिखाता है जिसमें लिखा होता है कि राजा आधी रात को अमल से मिलने आएगा। लेकिन जब तक राजा वास्तव में आता है, तब तक अमल हमेशा के लिए सो जाता है। नाटक के अंत में अमल की मृत्यु हो जाती है, तभी सुधा उसके लिए फूल लेकर आती है और वैद्य से अमल को यह बताने के लिए कहती है कि वो उसके लिए रोजाना की तरह फूल लेकर आई है। मार्मिक मोड़ पर आकर नाटक का  समापन होता है। 


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