कोविड-19 के टीके के लिए डीबीटी ने पुणे की फर्म को सीड फंडिंग उपलब्ध कराई

नई दिल्ली। डीबीटी-बीआईआरएसी ने भारत में अपनी तरह का पहला एमआरएनए आधारित वैक्सीन निर्माण प्लेटफार्म की स्थापना को सुगम बनाया है। डीबीटी ने कोविड-19 टीका के लिए जीनोवा के नोवेल सेल्फ एंप्लीर्फाइंग एमआरएनए आधारित टीका प्रत्याशी के विकास के लिए सीड फंडिंग उपलब्ध कराई है। अमेरिका के सीएटल स्थितएचडीटी बायोटेक कारपोरेशन के सहयोग से जीनोवा ने प्रदर्शित सुरक्षा, इम्युनोजेनिसिटी, रोडेंट एवं गैर-मानव प्राइमेट मोडेल्स में न्यूट्रलाइजेशन एंटीबाडी गतिविधि के साथ एक एमआरएनए वैक्सीन प्रत्याशी (एचजीसीओ19) विकसित किया है। यह कंपनी वर्ष के अंत तक पहला मानव परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय तरीके से काम कर रही है, जो भारतीय नियामकीय मंजूरियों के अध्यधीन है।


 



डीबीटी की सचिव एवं बीआईआरएसी की अध्यक्ष डॉ. रेणु स्वरूप ने इस विषय पर कहा, ‘अज्ञात एवं नए रोगजनकों से पैदा होने वाले रोगों के उन्मूलन के लिए नवीन एवं अभिनव विचारों की आवश्यकता होती है। डीबीटी द्वारा समर्थित जीनोवा का एम-आरएनए प्लेटफार्म न्यूक्लिएक ऐसिड वैक्सीन एवं डिलीवरी सिस्टम में की गई प्रगतियों का उपयोग करता है। इस वैक्सीन कैंडीडेट, जो नैनोटेक्नेलाजी का उपयोग करता है, ने पशु मॉडलों में प्रभावी रहे की उम्मीद दर्शाई है। जीनोवा के पास जो क्षमताएं हैं, उसे देखते हुए मुझे भरोसा है कि अगर यह मानव नैदानिक परीक्षणों में प्रभावी साबित हुआ तो इस वैक्सीन कैंडीडेट को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।’


जीनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड के सीईओ डॉ. संजय सिंह ने कहा कि, ‘वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी एवं टिकाऊ साल्यूशंस का सृजन करने के लिए निर्भीक कदम उठाये जाने की आवश्यकता है। जीनोवा डीबीटी-बीआईआरएसी की एमआरएनए आधारित अगली पीढ़ी की वैक्सीन के विकास की दिशा में पहल, दिशा-निर्देश, एवं वित्तीय सहायता की सराहना करती है। हमारी साझीदारी एक किफायती टीका के निर्माण की दिशा में समाधान उपलब्‍ध कराते हुए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए एक परितंत्र के निर्माण के लिए कृतसंकल्प है।’


एचजीसीओ19 के बारे में


नोवेल एमआरएनए टीका प्रत्याशी-एचजीसीओ19 के पास वायरस, जिसके होस्ट सेल्स रिसेप्टर के साथ परस्पर संपर्क करने की रिपोर्ट है, एंटीजन स्पाइक प्रोटीन के निर्माण के लिए मेजबान कोशिकाओं को दिशा निर्देशित करने के लिए सभी आवश्यक साधन उपलब्ध हैं और यह एक डिलीवरी वेहिकल के रूप में ‘लिपिड इन आर्गेनिक नैनोपार्टिकल (एलआईओएन)’द्वारा समर्थित है।


चूहों एवं गैर मानव प्राइमेट में वैक्सीन के न्यूट्रलाइजिंग एंटीबाडी रिस्पोंस की तुलना न्यूट्रलाइजिंग एंटीबाडी के लिए यूएस-एफडीए अनुशंसित 1:160 टाइटर से ऊपर, कोविड-19 के स्वास्थ्य लाभ कर चुकने वाले रोगियों से प्राप्त सेरा के साथ के साथ की गई।


इसके अतिरिक्त, एचजीसीओ19 के लाभ इसका एमआरएनए प्लेटफार्म डिजाइन एवं डिलीवरी वेहिकल है। एचजीसीओ19 एक ‘सेल्फ रेप्लीकेटिंग एमआरएनए प्लेटफार्म’का उपयोग करता है जो निम्न इंजेक्टेबल डोज (डोज-स्पेयरिंग प्रभाव) तथा दीर्घ अवधि के लिए सतत एंटीजन रिलीज सुनिश्चित करता है। एचजीसीओ19 के लिए प्रयुक्त ‘एलआईओएन डिलीवरी सिस्टम’के पास सहायक गुणधर्म, सवंर्द्धित भंडारण स्थिरता, निम्न प्रतिकूल प्रभाव, बेहतर पारगम्यता एवं जैवउपलब्धता है।


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) कृषि, स्वास्थ्य देखभाल, पशुविज्ञान, पर्यावरण एवं उद्योग के क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी के विकास एवं अनुप्रयोग सहित भारत में जैव प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देता है तथा उसमें तेजी लाता है।


बायोटेक्नॉलाजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टैंस काउंसिल (बीआईआरएसी) राष्ट्रीय रूप से संगत उत्पाद विकास आवश्यकताओं को पूरी करते हुए, कार्यनीतिक अनुसंधान एवं नवोन्मेषण आरंभ करने के लिए उभरते बायोटेक उद्यमों को सुदृढ़ तथा अधिकार संपन्न बनाने के लिए एक इंटरफेस एजेंसी के रूप में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा गठित एक लाभ के लिए नहीं, धारा 8, अनुसूची बी का सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम है।


भारत के पुणे में स्थित मुख्यालय वाली जीनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स लिमिटेड विभिन्न संकेतकों में जीवन के लिए खतरनाक रोगों के समाधान के लिए जैव उपचार के अनुसंधान, विकास, उत्पादन एवं वाणिज्यिकरण के लिए समर्पित एक जैव प्रौद्योगिकी कंपनी है।


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