'निजता' पर निगरानी ; क्या है चीन का 'तकनीकी दखल'

चीन ने हांगजो शहर में नागरिकों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने के लिए एक प्रयोग शुरू किया है। रिपोर्ट के अनुसार हांगजो में इस ऐप की मदद से शहर के एक करोड़ नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल करने की प्लानिंग है और अब लोगों का हेल्थ स्कोर जारी करने की योजना बनाई जा रही है।


जयपुर। कोविड-19 के इस दौर में हमें यह तो समझ आ गया है कि जिसके पास  अच्छा स्वास्थ्य है, इम्युनिटी है, भविष्य में उसी के क़दमों में दुनिया होगी, लेकिन बेहतर  स्वास्थ्य के लिए डाटा लेते -देते कहीं हमारी 'निजता' पर निगरानी तो नहीं की जा रही, इस पर ध्यान देना बेहद जरूरी है …..।


ज़रा सोचिये,  कोई यह जानना चाहे कि आप कितना चलते हैं, कितनी देर व्यायाम करते हैं, क्या खाते हैं, कितनी देर सोते हैं, आपके शौक क्या- क्या हैं तब...और तो और...आपका बैंक अकाउंट डिटेल भी उसे जानना हो तो...आप अवश्य कहेंगे कि मेरी निजी जानकारी जुटाने वाले आप कौन? और क्यों मैं आपको अपनी पर्सनल जानकारी शेयर करूँ? नाहक ही आप दूसरों की जिंदगी में दखल क्यों दे रहे हैं ?और अगर सरकार ऐसा करे तो भी क्या आपका उत्तर यही होगा? जाहिर है आप यही कहेंगे कि किसी विशेष हालात में जैसे कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सरकार ने जानकारी जुटाई तो कोई बात नहीं, पर ऐसा हमेशा तो नहीं होगा। तो यहां आपके लिए जानना जरूरी है कि चीन नागरिकों की जिंदगी में स्थायी रूप से ऐसी ही घुसपैठ करने जा रहा है और इसके लिए चीन ने हांगजो शहर में नागरिकों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने के लिए एक प्रयोग शुरू किया है। 'गार्जियन' की एक रिपोर्ट के अनुसार हांगजो में इस ऐप की मदद से शहर के एक करोड़ नागरिकों की निजी जिंदगी में दखल करने की प्लानिंग है और अब लोगों का हेल्थ स्कोर जारी करने की योजना बनाई जा रही है।



इस ऐप में नागरिकों को सिर्फ कोविड-19 के संक्रमण की ही नहीं, बल्कि अपने जीवन जीने की आदतों की जानकारी भी अपलोड करनी होगी। उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति शराब या सिगरेट पीता है तो उसे इसकी जानकारी भी देनी होगी। इतना ही नहीं, आप दिन में कितने कदम चलते हैं, ये भी आपको सरकार को बताना होगा। उदाहरण के लिए रोज़ 15 हज़ार कदम चलने पर 5 प्वाइंट प्लस हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति हर रोज एक गिलास व्हाइट वाइन पीता है तो उसके 1.5 प्वाइंट्स काट लिए जाएंगे। अगर कोई सिर्फ 7 घंटे या उससे कम सोता है तो उसके हेल्थ स्कोर से एक प्वाइंट और कम हो जाएगा तथा 7.5 घंटे नींद लेने पर 1 प्वाइंट जुड़ जाएगा। दिन में 5 सिगरेट पीने पर 3 प्वाइंट काटे जाएंगे। इस मोबाइल फोन ऐप के जरिए शहर के लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को एक जगह अपलोड किया जाएगा, नागरिकों को  अपनी सभी जानकारियां प्रशासन को मुहैया करानी होगी। इसी डाटा के आधार पर 100 नम्बर का हेल्थ स्कोर जारी किया जाएगा और ये हेल्थ स्कोर ही यह  तय करेगा कि आप किस सेवा का लाभ उठा पाएंगे और किसका नहीं। चीन इस हेल्थ स्कोर को ही नागरिकों का पासपोर्ट बनाने में लगा है। 


इस ऐप की मदद से किसी व्यक्ति का पूरा लेखा- जोखा तैयार किया जा सकता है, जिसमें उसके स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियों के अलावा उसकी वित्तीय स्थिति और यात्राओं का रिकॉर्ड भी होगा। रियल टाइम में रियल डाटा हासिल करना ही चीन की सरकार के डिजिटल सर्विलांस का ध्येय वाक्य बन गया है। इस ऐप को चीन की अली बाबा और टेन्सेंट जैसी बड़ी कंपनियों ने तैयार किया है और हांगजो प्रशासन ने इसे हाथों हाथ लिया है। अगर आप चीन में हैं तो यही क्यूआर कोड आपका सबसे बड़ा टिकट है, जिसके सहारे आप कहीं भी घूम- फिर सकते हैं ।  हांगजो प्रशासन का कहना है कि ये हेल्थ ऐप शहर के लोगों के लिए एक फायरवॉल की तरह काम करेगा और इसके जरिए लोगों के स्वास्थ्य और इम्यूनिटी को बेहतर बनाया जाएगा। 


गौरतलब है कि मोबाइल फोन ऐप, क्यूआर कोड्स और हेल्थ ऐप के जरिए चीन अपने नागरिकों को दो वर्गों में बांटना चाहता है। पहले वर्ग में वो लोग होंगे जिनके स्वास्थ्य पर कोई खतरा नहीं है और ऐसे लोगों को काम पर जाने, घूमने- फिरने और सेवाओं का इस्तेमाल करने की इजाजत होगी। जबकि दूसरे वर्ग में ऐसे लोग शामिल होंगे जिनका हेल्थ स्कोर कम है और जिन पर संक्रमण का खतरा है, ऐसे लोग या तो घरों से बाहर निकल ही नहीं पाएंगे या फिर उन्हें बहुत सारी पाबंदियों के साथ घर से बाहर निकलने की इजाजत मिलेगी। हेल्थ स्कोर ही यह तय करेगा कि आप किस सेवा का लाभ उठा पाएंगे और किसका नहीं। यानी किसी रेस्टोरेंट, सिनेमा हॉल या शॉपिंग मॉल में आपकी एंट्री आपकी जेब में रखे पैसों के दम पर नहीं बल्कि आपके हेल्थ स्कोर के आधार पर होगी।


हालांकि भारत में आरोग्य सेतु ऐप का इस्तेमाल भी कुछ इसी तरीके से होता है और चीन में भी ऐसा ‘हेल्थ कोड’  पहले फरवरी में 200  शहरों में जारी हुआ था। पर अब जब चीन कोरोना से करीब-करीब उबर गया है, तब भी वह  हेल्थ ऐप के जरिए नागरिकों पर हर समय नजर रखना चाहता है । यह ऐप लोगों से तमाम तरह के निजी डाटा हासिल करेगा और इस ऐप को इंस्टॉल करने वाले हर व्यक्ति पर हर समय नजर रखी जा सकेगी।


यहाँ यह भी जानना ख़ास है कि चीन की कम्युनिस्ट  पार्टी की वार्षिक बैठक में भी इस पर चर्चा हुई। राजनीतिक सलाहकार ज़ू होंगलिंग ने तो ये प्रस्ताव भी सभा में रखा कि किसी कपल को तभी माता- पिता बनने की इजाजत दी जाए, जब उसके पास हेल्थ सर्टिफिकेट हो, ताकि कोई बीमारी माता-पिता से बच्चों में ना फैले। जाहिर है कि चीन में अब लोगों के जन्म से मृत्यु तक होने वाली सारी घटनाएं इसी हेल्थ स्कोर के आधार पर तय होगी।


सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्ताव के लिए सोशल मीडिया पर आलोचना और नाराजगी भरे कई  उत्तर मिले, कई उपयोगकर्ताओं ने गोपनीयता की चिंताओं को उठाया था। एक का कहना था, “व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच की सीमा को प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य कोड दूसरों के पढ़ने के लिए है। दूसरों को आपकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिपोर्ट पढ़ने का कोई अधिकार नहीं।" "मेरे धूम्रपान करने,  पीने और सोने की आदतों के साथ आपको क्या करना है? हमारे पास कोई गोपनीयता नहीं बची है," दूसरे उपयोगकर्ता का कहना था। मौजूदा ऐप चीनी सरकार के लिए विकसित किए गए सर्वव्यापी प्लेटफॉर्म अलीपे और वीचैट पर चलाए गए हैं। एक टिप्पणीकार ने कहा कि अगर ऐप स्थायी हो जाता है तो वे अपने फोन से अलीपे को हटा देंगे।


बेशक, इसकी हांगजो शहर में सफलता के बाद ही इसे अन्य शहरों में लागू  किया जाएगा। सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देश भी इसी दिशा में काम कर रहे हैं।  इनमें ब्रिटेन, अमेरिका,  इटली, चिली और जर्मनी जैसे देश शामिल हैं।  इतना सब कुछ देखकर जेहन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हमारे देश में भी कभी शादी करने, विदेश यात्रा करने में इम्युनिटी सर्टिफिकेट देखे जायेंगे ? फिलहाल तो यह नहीं लगता, लेकिन भविष्य के गर्त में क्या छिपा है, यह तो समय ही बताएगा।


अंग्रेजी में दो मशहूर कहावतें हैं, पहली है- ‘हेल्थ इज वेल्थ’ यानी स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है और दूसरी है- ‘सर्वाइवल ऑफ़ द फिटेस्ट’ मतलब जो फिट है, वही जीवन में आगे बढ़ सकता है। इसलिए आपको आज से ही इस दिशा में काम शुरू कर देना चाहिए। स्वस्थ शरीर ही आपके भविष्य की बुनियाद तय करेगा।


 


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