कोरोना के दौर में भाषा के मोर्चे पर बड़ा बदलाव, दुनियाभर में रचे गए नए शब्द

नई दिल्ली।  'कोरोनाबेबीज़' और 'क्वारंटीन' से लेकर 'कोविडियट्स' तक, ऐसे अनेक शब्द हैं, जो इन दिनों कोरोना वायरस के दौर में चलन में आ गए हैं। कोरोना वायरस के कारण भाषा को लेकर दुनियाभर में जो बदलाव हुए हैं, उन्हें देखकर भाषा विज्ञानी भी अचंभित हैं। हाल में लोकप्रिय हुए कई शब्द सामाजिक दूरी वाले मानवीय संपर्क से संबंधित हैं, जैसे 'वर्चुअल हैप्पी ऑवर', 'कोवीडियो पार्टी' और 'क्वारंटीन एंड चिल'।



ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी की सीनियर एडिटर फियोना मैकफर्सन के मुताबिक दिसंबर तक 'कोरोनावायरस' शब्द का इस्तेमाल दस लाख टोकन (शब्दकोश के लिए संग्रह की जाने वाली भाषा की सबसे छोटी इकाई) में सिर्फ़ 0.03 बार हो रहा था। 'कोविड-19' शब्द तो इसी फरवरी में बनाया गया जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरस को आधिकारिक नाम दिया। लेकिन अप्रैल आते-आते 'कोविड-19' और 'कोरोनावायरस' का इस्तेमाल प्रति दस लाख टोकन में करीब 1750 बार तक पहुंच गया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि ये दोनों शब्द करीब-करीब बराबर इस्तेमाल हो रहे हैं।


बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार कई लोग 'कोरोना' को उपसर्ग की तरह इस्तेमाल करते हैं, जबकि पोलैंड के लोगों ने 'कोरोनावायरस' को क्रिया में बदल दिया है। 'कोरोनाबेबीज़' शब्द उन बच्चों के लिए बना है जो इस महामारी के समय पैदा हुए या जो इस समय गर्भ में हैं। कुछ शब्दों के संक्षिप्त नाम भी चल निकले हैं और सर्वव्यापी हो गए हैं, जैसे डब्लूएफएच (वर्क फ्रॉम होम) और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट)। लेकिन मैकफर्सन मानती हैं कि शब्दकोश में शामिल किया एकमात्र असल शब्द 'कोविड-19' ही है।बाकी शब्द पहले से मौजूद हैं, लेकिन नये हालात में उनको नया अर्थ मिल गया है।अलग-अलग देशों के लोग अलग-अलग आदेशों के अधीन हैं- जैसे अमरीका में 'स्टे-एट-होम ऑर्डर', मलेशिया में 'मूवमेंट कट्रोल ऑर्डर' और फिलीपींस में 'एनहांस्ड कम्युनिटी क्वारंटीन'।वह कहती हैं, "इस समय हम बहुत से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो पहले से मौजूद हैं, लेकिन वे शब्द एकदम नये लग रहे हैं। 'कोरोनावायरस' शब्द भी 1960 के दशक का है।"


इस तरह के गंभीर शब्दों से हटकर कुछ हल्के-फुल्के शब्द भी बने हैं। जर्मन का 'कोरोनास्पेक' अंग्रेजी के 'कोविड 19' की तरह घर पर रहने के आदेश के बीच तनाव मिटाने से संबंधित है। स्पेनिश के 'कोविडियोटा' और 'कोरोनाबरो' शब्द उन लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए बनाए गए जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहों की अनदेखी करते हैं (बरो का अर्थ है गधा)। 'डूम्सस्क्रॉलिंग' का मतलब है कि इंटरनेट पर लगातार बुरी ख़बरों को पढ़ते जाना।ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेजी में भी हल्के-फुल्के अर्थ वाले संक्षिप्त शब्दों के ख़ूब प्रयोग होता है। वहां क्वारंटीन के लिए 'क्वाज़' और सैनेटाइज़र के लिए 'सैनी' बनाया गया।


अश्वेत समुदाय अक्सर भाषा में नये प्रयोग करते रहते हैं। उन्होंने कोरोना वायरस को 'मिस रोना' कहना शुरू किया। जो कहा न सके उसके लिए हमेशा इमोजी मौजूद रहता है। जुड़े हुए हाथ वाले इमोजी, मेडिकल मास्क वाले इमोजी और माइक्रोब वाले इमोजी इस महामारी के समय पहले से ज़्यादा लोकप्रिय हो गए हैं।


महामारी के बाद उन्हीं शब्दों के टिके रहने की संभावना होगी जो स्थायी व्यवहार परिवर्तन को बताते हैं, जैसे 'ज़ूमबॉम्बिंग' जो 'फोटोबॉम्बिंग' शब्द से प्रभावित है। यह किसी और के वीडियो कॉल में अतिक्रमण करने की आदत को बताता है। मैकफर्सन का मानना है कि ज़ूम कंपनी का प्रभुत्व ख़त्म होने के बाद भी 'ज़ूमबॉम्बिंग' एक सामान्य शब्द बना रह सकता है। वर्तमान की कठिनाइयां कोरोना शब्दों की तरह हमेशा के लिए नहीं रहेंगी। 


Popular posts from this blog

मौत दबे पाँव आई और लियाक़त अली भट्टी को अपने साथ ले गई !

'बालिका वधु' जैसे धारावाहिकों के डायरेक्टर रामवृक्ष आज सब्जी बेचने को मजबूर

कोरोना की चपेट में आए वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ के निधन से मीडियाकर्मियों में हड़कंप