संगीत और नृत्य के बिना जीवन हुआ बेसुरा, अब दो वक्त की रोटी का संकट

मुंबई।  कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन ने लोगों की जिंदगी से संगीत और नृत्य भी गायब कर दिया है। कम से कम फिल्मों में नृत्य करने वाले कलाकारों की ज़िन्दगी पर तो यह बात पूरी तरह लागू हो रही है। सैकड़ों बैकग्राउंड डांसर इन दिनों अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं। वर्तमान हालात ने  हीरो-हीरोइन के साथ नृत्य करने वाले कलाकारों  के जीवन पर बहुत बुरा असर डाला है और कड़ी मेहनत के बावजूद बेहद मामूली मेहनताना पाने वाले इन कलाकारों के सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट पैदा हो गया है।



सिने  डांसर्स एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि संकट के इस दौर में बैकग्राउंड डांसर की भी हरसंभव सहायता की जाये ताकि वे हालात सामान्य होने तक वे भी अपना ठीक-ठाक गुज़ारा कर सकें। इस एसोसिएशन में 800 सदस्य हैं। एक बैकग्राउंड डांसर को आम तौर पर 1,000 रुपए रोज़ मिल जाते हैं , लेकिन पिछले दो महीने से शूटिंग इत्यादि बंद होने से उनकी रोज़  की आमदनी रुक गई है। इनमे से अनेक बैकग्राउंड डांसर ऐसे हैं, जिनकी रातों की नींद उड़ गई है क्योंकि घर में सिर्फ वही कमाने वाले हैं। एक नृत्य के लिए एक बैकग्राउंड डांसर को 4,500 रुपए मिलते हैं और रिहर्सल के लिए एक शिफ्ट में 750 रुपए मिलते हैं।


सिने  डांसर्स एसोसिएशन का कहना है कि इस संगठन के अनेक लोगों को मदद की दरकार है और इसके लिए कुछ डांसर ने  सोशल मीडिया के जरिए मदद मांगने का निर्णय किया। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो पर रेमो डिसूजा और बोस्को जैसे नृत्य निर्देशकों का ध्यान गया। इसके अलावा धर्मा प्रोडक्शन्स तथा रैपर रफ्तार ने भी इसे गंभीरता से लिया और मदद का भरोसा दिया है। रेमो डिसूजा कहते हैं,‘‘ हम सब जानते हैं कि हालात वाकई में खराब हैं और फिल्म उद्योग जल्दी नहीं खुलने वाला। हमें उनकी मदद करनी चाहिए और उनके साथ खड़े होना चाहिए।’’


लगभग सभी कलाकारों की यही समस्या है। अधिकतर कलाकार मुंबई से बाहर के हैं और किराए के मकानों में रहते हैं। उनका कहना है कि न तो उनके पास किराया देने के लिए पैसा है और न ही खाने पीने के लिए।


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