दिल्ली आईआईटी के वैज्ञानिकों ने बनाया पीपीई  किट, वज़न सिर्फ 300 ग्राम

नई दिल्ली।  दिल्ली आईआईटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी पीपीई  किट बनाने में सफलता हासिल की है, जो न सिर्फ सबसे हल्की है, बल्कि कई खूबियों से भी लैस है। बाजार में अभी जो पीपीई मौजूद हैं, उनका वजन 400 से 500 ग्राम के करीब है। लेकिन आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एमिरिटस डॉ एस.एम.इश्तियाक ने डीआरडीओ के कानपुर स्थित डिफेंस मटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डिवेलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) के सहायक निदेशक डॉ बिसवा रंजन के साथ मिलकर इस आरामदायक पीपीई किट को तैयार किया है।



वैज्ञानिकों के मातबिक यह पीपीई किट मौजूदा पीपीई से बहुत अलग है और इसमें कई सुविधाएं प्रदान की गई हैं। इसमें इस तरह से फाइबर का उपयोग किया गया है जिससे संक्रमित कण इस पर नहीं ठहर सकते हैं। पानी भी इसमें डलेगा तो वह छलक जाएगा। यह कोविड-19 से डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मियों का बचाव करने में सक्षम है। इसका वजन 300 ग्राम है जो बाजार में अभी मिल रहे पीपीई से बहुत कम है। इसके साथ ही गर्मी के समय में डॉक्टरों, नर्सों को कोई परेशानी न हो इसके लिए इस किट को इस प्रकार तैयार किया गया है कि जिससे यह शरीर की गर्मी को भी बाहर भेजेगा। जिसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों को गर्मी से परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। इस पीपीई किट की कीमत 900 रुपये है।


दरअसल इधर  देश के वैज्ञानिक और डॉक्टर कोरोना मरीजों के इलाज के लिए चिकित्सीय उपकरण और दवाएं बनाने में निरंतर जुटे हुए हैं। अब बेंगलुरू स्थित वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद  की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरी  के साइंटिस्ट ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए एक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर बीपैप (बीआईपीएपी) बनाया है। वैज्ञानिकों ने वेंटिलेटर को रिकॉर्ड 36 दिनों के भीतर तैयार किया है। इस वेंटिलेटर का नाम ‘स्वस्थ वायु’ रखा गया है। निदेशक जेजे जाधव के मुताबिक टीम ने एयरोस्पेस डिजाइन डोमेन में अपनी विशेषज्ञता के आधार पर स्पिन-ऑफ तकनीक को सक्षम किया है। एनएएल हेल्थ सेंटर में इस प्रणाली के कड़े बायोमेडिकल परीक्षण और बीटा क्लिनिकल परीक्षण हुए हैं। इतना ही नहीं वैश्विक अनुभव के आधार पर और भारत व विदेश में मौजूद विशेषज्ञों से परामर्श के बाद इस वेंटिलेटर को तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि यह मध्यम और गंभीर कोरोना मरीजों का इलाज करने में सक्षम होगा। इस वेंटिलेटर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए किसी स्पेशल नर्सिंग की आवश्यकता नहीं है। ये किसी वार्ड, अस्थायी अस्पताल या डिस्पेंसरी में भी इस्तेमाल में लाया जा सकता है। नर्सिंग स्टाफ को इसके लिए प्रशिक्षित करने की जरूरत नहीं है। सबसे बड़ी बात है कि इस वेंटिलेटर को स्वदेशी उपकरण और तकनीक से तैयार किया गया है। इसे एनएबीएल की मान्यता प्राप्त एजेंसियों ने प्रमाणित किया है। जल्द ही नियामक अधिकारियों से मंजूरी मिलने के बाद अस्पतालों में नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर का इस्तेमाल शुरू हो जाएगा।


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