भविष्य का सिनेमा- ड्राइव इन सिनेमा

जयपुर। आज कोरोना महामारी से बचने के लिए देशभर  में लॉकडाउन है,  हम सब घरों में बंद हैं । इधर देश में  सिनेमा घरों को बंद हुए दो  महीने  होने जा रहे हैं। ऐसे में सिनेमा प्रेमियों का मायूस होना स्वाभाविक है । हालांकि हम घर में फ़िल्में देख मनोरंजन कर लेते हैं, पर इस माहौल में आपको घर से बाहर जाकर, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बड़े परदे पर फिल्म देखने को मिले, तो…। शायद यकीं नहीं हो रहा, पर ऐसा संभव है  'ड्राइव इन सिनेमा' से ।



अगस्त, 2016 में जब मुंबई के  एक पूर्वी उपनगर बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मेकर मैक्सिटी नाम से जब मुंबई का पहला 'ड्राइव इन सिनेमा' शुरू हुआ था, तब बहुत सारे लोगों ने इस कांसेप्ट की कामयाबी पर संदेह जताया था। लेकिन मौजूदा दौर में ' ड्राइव इन थिएटर'  या  'ड्राइव इन सिनेमा'  तेजी से अपनी जगह बना  रहा है। हालांकि 'ड्राइव इन सिनेमा'  कांसेप्ट नया नहीं है, लेकिन कोरोना काल में इसका चलन  तेजी से बढ़ रहा है और संभव है कि यह भविष्य में अच्छी लोकप्रियता हासिल कर ले। कल्पना कीजिये,  ड्राइव इन थिएटर में कई सारे लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए  एक समय में फिल्म देख रहे हैं। आपने अपनी गाड़ी पार्किंग में लगाई,  सामने एक बड़ी स्क्रीन पर फिल्म दिखाई जा रही है । वहां और भी कई सारी गाड़ियां लगी  हैं। आपको कार में मौजूद  एफ एम रेडियो के जरिये आवाज़ सुनाई दे रही है ।


हमारे देश की बात करें तो यहां अभी मुंबई, अहमदाबाद और गुरुग्राम में  'ड्राइव इन थिएटर' का इंतजाम है, पर लोग  इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते । लेकिन अगर लंबे समय तक देश में सिनेमा हॉल नहीं खुलते हैं तो  फिल्म देखने का अनुभव हमेशा के लिए बदल सकता है । आप  'ड्राइव इन थिएटर' के माध्यम से फिल्म देखने का लुत्फ़ ले सकते हैं । कभी प्राइवेसी के लिए इसे शुरू किया गया होगा, पर आज इसके साथ सोशल डिस्टेंसिंग रखना मुमकिन हो पायेगा । ऑनलाइन या ऑफलाइन टिकट लेने के बाद वहां के कर्मचारी आपको संक्रमण मुक्त करेंगे । खुले मैदान में कारे कतारबद्ध खडी होंगी । मेन्यू  देख आर्डर करने पर डिनर भी साथ -साथ ले सकते हैं यानी पूरा मनोरंजन,  सबकुछ  नियमों के साथ ।


हाल ही ईरान में 1979 की इस्लामी क्रान्ति के बाद पहली बार 'ड्राइव इन थिएटर' में लोगों को फिल्म देख आनंद उठाने का मौका मिला और ज्यादातर दर्शकों ने जीवन में पहली बार इसका लुत्फ़ उठाया । गौरतलब है कि आज ईरान कोविड-19 से पीड़ित दुनिया के 10 शीर्ष देशों में शामिल है । जहां सबकुछ बंद  है, लॉकडाउन है, घर से बाहर जाकर मनोरंजन कर पाना कितना सुकून दे सकता है । इन मुश्किल हालत में मिलाद टावर की पार्किंग में फिल्म देख लोग ख़ुशी जाहिर कर रहे थे ।


ईरान ही नहीं, जर्मनी, साउथ कोरिया और अमेरिका में भी यह ट्रेंड देखने में आ रहा है । अभी हाल ही में लिथुआनिया में  एयरपोर्ट विलनियस  को 'ड्राइव इन थिएटर' में बदल दिया गया  क्योंकि कोरोना काल में इधर फ्लाइट्स  नहीं चल रहीं और उधर सिनेमाघर बंद हैं । सो इस दौर में  मुमकिन है, यह भविष्य का सिनेमा बन जाए।


और एक ख़ास बात और। जो लोग 'ड्राइव इन थिएटर' को एक नया कांसेप्ट समझते हैं, उन्हें हम बता दें कि दुनिया का पहला 'ड्राइव इन थिएटर' 1933 में अमेरिका के न्यू जर्सी के कैमडेन बाउलेवार्ड पर स्थित पार्क-इन थियेटर्स में शुरू किया गया था, जिसमें 2,500 कारों के लिए पार्किंग की जगह, बच्चों के लिए  खेल का मैदान और एक रेस्तरां था और यह 28-एकड़ में फैला था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ड्राइव-इन की लोकप्रियता बढ़ गई और 1950 के दशक के मध्य से 60 के दशक के मध्य तक अमेरिका में  इनकी संख्या 5,000 सिनेमाघरों तक पहुंच गई। ड्राइव-इन्स अमेरिकी संस्कृति का एक प्रतीक बन गया, और न केवल माता-पिता और बच्चों के लिए बल्कि  गोपनीयता की तलाश करने वाले किशोर जोड़ों के लिए एक विशिष्ट सप्ताहांत गंतव्य भी। आज, संयुक्त राज्य अमेरिका में 500 से अधिक ड्राइव-इन थिएटर मौजूद  हैं।


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