सोशल मीडिया पर फेक न्यूज की भरमार, स्थापित मीडिया की भूमिका बढ़ी- कली पुरी

नई दिल्ली। ‘इंडिया टुडे’ समूह की वाइस चेयरपर्सन कली पुरी ने कहा है कि इन दिनों सोशल मीडिया पर  फेक न्यूज की भरमार है, ऐसी सूरत में स्थापित मीडिया की भूमिका और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि संकट के इस दौर में टीवी न्यूज की व्युअरशिप में काफी उछाल देखा गया है। आज के समय की जरूरत को देखते हुए मीडिया ने अपने कंटेंट को उसी के अनुसार तैयार करने के लिए तमाम कदम उठाए हैं। दर्शक इन दिनों न्यूज चैनल्स ज्यादा देख रहे हैं, यही कारण है कि व्युअरशिप के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं। 


 


वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ के साथ बातचीत के दौरान कली पुरी ने कहा कि लोग संकट के इस दौर में विश्वसनीय जानकारी पाना चाहते हैं। दरअसल, हम महामारी के साथ-साथ अन्य तमाम मोर्चों पर भी जूझ रहे हैं। स्थापित मीडिया की भूमिका इससे पहले कभी इतनी महत्वपूर्ण नहीं रही है। इस महामारी ने लोगों को याद दिला दिया है कि मीडिया की भूमिका एक आवश्यक सेवा है।  लॉकडाउन के दौरान ‘आजतक’ के दर्शकों की संख्या रिकॉर्ड 290 मिलियन हो गई और ‘इंडिया टुडे टीवी’ अंग्रेजी न्यूज जॉनर में टॉप पर है, इससे साबित हो गया है कि लोग हमारी पत्रकारिता पर कितना ज्यादा भरोसा करते हैं। जब मामला जीने-मरने से जुड़ा होता है तो ऑडियंस कभी भी डिबेट्स और एंटरनेटमेंट को न्यूज के रूप में देखना नहीं चाहते हैं। वे बस यह जानना चाहते हैं कि आखिर पूरी दुनिया में क्या चल रहा है। हमारे एंकर्स ने इस दौरान यह सुनिश्चित किया कि लोगों को दुनियाभर के डॉक्टरों, महामारी विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों, जीवाणु विज्ञानियों और अंतरिक्ष विज्ञानियों तक के विचारों को जानने-समझने का मौका मिले।   


उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस ने हमारे जीवन को काफी बदल दिया है। कोरोना के कारण लोग घरों से काम (वर्क फ्रॉम होम) कर रहे हैं, वहीं वर्चुअल हाउस पार्टी कर रहे हैं। लोग इस मुश्किल समय में खुद को अकेला नहीं बल्कि दूसरों से जुड़ा हुआ महसूस करना चाहते हैं। अपनी प्रोग्रामिंग के जरिये हम चाहते हैं कि लोग यह जानें कि वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में हम सभी एक साथ हैं। स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसने हमें यह भी सिखा दिया है कि चीजों को अलग तरीके से कैसे किया जा सकता है। बहुत बार, दिनचर्या इस तरह से सेट हो जाती है कि इसे तोड़ना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस तरह का आपातकाल लोगों को कुछ नया करने और कुछ अलग करने के लिए मजबूर करता है क्योंकि आपके पास कोई विकल्प नहीं है। पिछले तीन हफ्तों से हमारे यहां से नए तरीके से काम हो रहा है, जिसको देखकर मैं खुद हैरान हूं।


उन्होंने कहा कि हम नॉन-ट्रैडिशनल ब्रैंड्स को टीवी पर लाने के लिए नए-नए तरीके खोज रहे हैं। मुझे लगता है कि टीवी ब्रैंड्स के साथ-साथ डिजिटल और सोशल पर हमारी मजबूत स्थिति के कारण हम एडवर्टाइजर्स को काफी प्रभावी कॉम्बो डील्स की पेशकश करने में सक्षम हैं। इन दिनों टीवी रेटिंग सस्पेंड करने को लेकर तमाम बातें हो रही हैं। इसे लेकर मुझे लगता है कि यह कदम अपने आप को हराने जैसा है। हम रेटिंग क्यों निलंबित करना चाहेंगे? बेंचमार्क तय करने के लिए यह समय न्यूज चैनल्स के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।  लॉकडाउन के पहले की तुलना में 13वें हफ्ते में टीवी दर्शकों की संख्या में 43% की वृद्धि हुई है, जबकि न्यूज कैटेगरी में 251% की वृद्धि हुई है। ऐसे में आपके पास रेटिंग होनी चाहिए, ताकि आंकड़े सामने आ सकें और सही स्थिति का पता चले। इसके अलावा, मेरा मानना है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी हमें जितना संभव हो सके, बिजनेस की कोशिश करनी चाहिए।


Popular posts from this blog

जुनूनी एंकर पत्रकार रोहित सरदाना की कोरोना से मौत

'बालिका वधु' जैसे धारावाहिकों के डायरेक्टर रामवृक्ष आज सब्जी बेचने को मजबूर

'कम्युनिकेशन टुडे' ने पूरा किया 25 साल का सफ़र, मीडिया शिक्षा की 100 वर्षों की यात्रा पर विशेषांक