पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले उजागर करने वाला पत्रकार 'लापता'

 


नई दिल्ली। पाकिस्तान से भागकर किसी तरह स्वीडन पहुंचने वाले पत्रकार साजिद बलोच लापता हैं। उन्हें आखिरी बार स्वीडन की राजधानी में एक ट्रेन में सवार होते हुए देखा गया था। पाकिस्तान के पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों ने स्वीडन से लापता पत्रकार साजिद हुसैन बलोच को खोजने में ज्यादा प्रयास झोंकने की मांग की है। 32 साल के बलोच दो मार्च से लापता है। आखिरी बार उन्हें स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से उपसाला जाने वाली ट्रेन में सवार होते हुए देखा गया था।



साजिद बलोच के नजदीकी मित्र ताज बलोच ने पोर्टल डीडब्ल्यू से कहा, "दो मार्च की दोपहर तक वह मेरे साथ थे और मैं इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता कि इस देश में वह लापता हो जाएंगे। वह एक गैर राजनीतिक व्यक्ति हैं, जिनका भाषा और साहित्य की तरफ झुकाव है। उनकी गुमशुदगी के पीछे मौजूद फ़रमों को समझना मुश्किल है।”


पेरिस मुख्यालय से चलने वाली गैर सरकारी संस्था रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के मुताबिक तीन मार्च को स्वीडन की पुलिस ने बलोच की गुमशुदगी का केस दर्ज किया। बलोच के रिश्तेदारों का आरोप है कि स्वीडिश सरकार ने साजिद की गुमशुदगी को गंभीरता से नहीं लिया। परिवार को साजिद की जान की चिंता हो रही है। लापता पत्रकार के भाई वाजिद बलोच ने  कहा, "अगर हमारे भाई को कुछ भी हुआ तो स्वीडन की पुलिस को जिम्मा लेने के तैयार रहना होगा क्योंकि हम उन्हें मामले की गंभीरता समझाने के लिए सब कुछ कर चुके हैं।”


आरएसएस को शक है कि पाकिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले उजागर करने वाले साजिद बलोच को "पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के इशारों पर अगवा” किया गया है।


सन 2012 में पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत से भागने वाले साजिद बलोच 2017 से स्वीडन में रह रहे थे। फिलहाल वह स्टॉकहोम में रहते हुए उपसाला यूनिवर्सिटी में ईरानी भाषा में मास्टर्स कर रहे थे। एक खाली कमरा मिलने के बाद दो मार्च को उन्हें स्टॉकहोम से उपसाला शिफ्ट होना था, लेकिन उसी दिन वह लापता हो गए।


मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान की सरकार, सेना और खुफिया एजेंसियां बलोचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन करते हैं। कई लोगों की गुमशुदगी का आरोप भी उन पर है। इस्लामाबाद इन आरोपों से इनकार करता है और अपने चिर प्रतिद्वंद्वी देश भारत पर बलोचिस्तान में हिंसा व अलगाववाद भड़काने का आरोप लगाता है।


दो बच्चों के पिता साजिद बलोच लंबे वक्त से कई देशों में निर्वासन में रह रहे थे। 2017 में वह स्वीडन पहुंचे और वहां शरण की अपील की। पाकिस्तान में रहते हुए बलोच पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी अखबारों द न्यूज और द डेली टाइम्स के लिए काम करते थे। वह बलोचिस्तान टाइम्स वेबसाइट के एडिटर इन चीफ भी थे। यह न्यूज वेबसाइट बलोचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन और मादक पदार्थों से तस्करी से जुड़ी रिपोर्टें छापती थीं। अब इस वेबसाइट को पाकिस्तान में एक्सेस नहीं किया जा सकता है।पाकिस्तान में पत्रकारों के केंद्रीय संघ ने अपनी सरकार और विदेश मंत्रालय से साजिद बलोच के मामले में स्वीडन के साथ सहयोग करने की अपील की है।


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