'मंथरा' के कारण ललिता पवार से नफ़रत करने लगे थे लोग

मुंबई। इन दिनों रामानंद सागर के डायरेक्शन में बने धारावाहिक 'रामायण' को फिर से टेलीविज़न  पर प्रसारित किया जा रहा है  और रामायण के अनेक किरदार ऐसे हैं जिन्हे छोटे परदे पर  देखने के बाद तमाम  लोग उनसे नफ़रत करने लगे थे।  ऐसा ही एक किरदार मंथरा का भी है, जिसे परदे पर साकार किया था ललिता पवार ने। उन्होंने रामायण में ऐसी बेहतरीन एक्टिंग की थी कि लोग यह भूल गए थे कि वे परदे पर सिर्फ एक केरेक्टर को प्ले कर रही हैं। आज बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि ललिता पवार ने फिल्मों में ग्लैमरस रोल के साथ अपने अभिनय जीवन की शुरुआत की थी। 



 


सिर्फ 9 साल की उम्र में बाल कलाकार के तौर पर सिनेमा में काम की शुरुआत करने वाली अम्बा लक्ष्मण राव शगुन उर्फ ​​ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को महाराष्ट्र के नासिक में हुआ था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में 'आर्य महिला' फिल्म से की थी।  1935 में उन्होंने एक युवा नायिका के रूप में अपने ग्लैमरस अवतार के साथ सिल्वर स्क्रीन पर धूम मचाई।  अपनी अगली फिल्म 'दैवी खज़ाना' में वह बिकनी में दिखाई दीं और काफी हलचल मचाई।  उसके बाद ललिता पवार ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। उन्होंने एक के बाद एक हिट फिल्में दीं। उन्होंने 600 से अचिक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया। 


'दहेज' में उन्होंने  एक क्रूर सास के चरित्र को निभाया, जिसके हृदयहीन कृत्यों ने दर्शकों को चौंका दिया। उसके बाद, ललिता पवार हिंदी सिनेमा की क्रूर 'सास' बन गईं। हालांकि, उन्होंने बीच-बीच में कुछ सकारात्मक भूमिकाएं भी निभाईं, लेकिन वह क्रूर सास या भाभी के किरदारों की पसंदीदा पसंद बनी रहीं।  1990 में, ललिता को जबड़े के कैंसर का पता चला था। वह अपने इलाज के लिए पुणे शिफ्ट हो गईं।  इस बीच, उन्होंने हत्यारे (1990), शिव तेरी महिमा न्यारी (1992) और मुस्कुराहाट (1992) जैसी कुछ फिल्में कीं।


हिंदी सिनेमा जगत में जबरदस्त खलनायिका के तौर पर पहचानी जाने वालीं ललिता पवार को आज भी लोग उनके अभिनय से याद करते हैं। एक दबी हुई आंख की वह नफरत भरी निगाह, चेहरे पर वे डरावने भाव और जुबां पर बहू को कोसते हुए कर्कश अल्फाज- ‘अरी कलमुंही!’ यह ललिता पवार की अदाकारी की वे अदाएं थीं, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड में सबसे क्रूर सास होने की पहचान दिलाई। जिस शिद्दत से ललिता पवार ने इस इमेज में खुद को ढाला, वह हिंदी सिनेमा में मील का पत्थर साबित हुआ।  वो ज्यादातर फिल्मों में नेगेटिव रोल में नजर आईं। ललिता के बेहतरिन एक्टिंग की वजह से रामानंद सागर ने उन्हें रामायण में मंथरा रोल ऑफर किया था। मंथरा का जबरदस्त अभिनय कर उन्होंने सबको हैरान कर दिया था।                            


ललिता पवार ने रामायण में राजा दशरथ की पत्नी कैकेयी की दासी मंथरा का रोल निभाया था। इस शो में इनकी एक्टिंग देखकर लोग काफी खुश हुए। टीवी की दुनिया के बाहर उन्हें दर्शकों का प्यार तो मिला, लेकिन मंथरा के रोल से लोग उनकी आलोचना भी करते थे। कई बार उनके साथ ऐसा हुआ भी हुआ कि जब वह कहीं बाहर पब्लिक प्लेस पर गईं तब लोग उन्हें भला बुरा कहकर उनके प्रति अपनी नफरत को दिखाया। हालांकि इन सबका ललिता के उपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा बल्कि वह खुश थी लोगों को उनकी एक्टिंग एक दम वास्तविक लगी।                            


दरअसल, ललिता तो नायिका  बनने के सपने को जी रही थीं, लेकिन उनका वह सपना एक हादसे की वजह से चकनाचूर हो गया था। बात साल 1942 की है। जंग-ए-आजादी  फिल्म की शूटिंग चल रही थी। फिल्म के एक सीन में भगवान दादा को ललिता पवार को थप्पड़ मारना था। भगवान दादा से दूरी का सही अंदाज लगाने में चूक हुई और उन्होंने दुर्घटनावश ललिता पवार को इतनी तेज थप्पड़ मार दिया कि वह जमीन पर गिर पड़ीं। उनकी आंख की एक नस फट गई। हादसे से उबरने के बाद वह दबी हुई आंख ही उनकी खासियत बन गई और इसी के बलबूते उन्होंने बेहतरीन कैरेक्टर आर्टिस्ट के तौर पर पांव जमाया। उन्होंने अनाड़ी, श्री 420, प्रोफेसर, मेम दीदी, औरत व मिस्टर ऐंड मिसेस 55  जैसी फिल्मों में यादगार काम किया।


24 फरवरी 1998 को जब वह घर में अकेली थीं, तब उसकी मृत्यु हो गई।  यह एक विडंबना थी कि अद्भुत अभिनेत्री जो हमेशा लाइमलाइट में रहीं, एक बीमारी ने उन्हें सबसे दूर कर दिया।  गुमनामी के हालात में उनका निधन हो गया। जब उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली तो दो दिनों तक किसी को खबर नहीं थी। उनका एक बेटा है  जय पवार जो फिल्म उद्योग में अपनी पहचान नहीं बना पाया। उनक पोते मनोज पवार ने एक्टिंग की दुनिया में बहुत संघर्ष किया लेकिन वो भी अपनी कोई पहचान नहीं बना पाया है। 


      


 


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