कोरोना के कारण बढ़े मानसिक अवसाद के मरीज़, नौ करोड़ से ज्यादा लोग पहले ही चपेट में

 


नई दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से जारी देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान मानसिक अवसाद के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। बंगाल समेत विभिन्न राज्यों में इसकी वजह से कम से कम एक दर्जन लोगों ने आत्महत्या कर ली है।आत्महत्या करने वालों में पंजाब का एक दंपती भी शामिल है। केरल में तो सात लोग लॉकडाउन के कारण से शराब नहीं मिलने की वजह से अवसादग्रस्त होकर जान दे चुके हैं। कई दूसरे राज्यों से भी ऐसी खबरें सामने आने लगी हैं।



मीडिया रिपोर्टों के अनुसार देश भर में मानसिक अवसाद की वजह से आत्महत्या के मामलों को छोड़ भी दें तो भारी तादाद में लोग अवसाद की चपेट में आ रहे हैं। कोई कमाई ठप्प होने से अवसाद में है तो कोई लगातार घर में बंद रहने की वजह से। किसी को भविष्य की चिंता खाए जा रही है तो किसी को करियर की। यही वजह है कि अस्पतालों के मानसिक रोग विभाग में ऐसे मरीजों की कतारें दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही हैं। एक कोरोना पीड़ित युवक ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल की सातवीं मंजिल से कूद कर अपनी जीवनलीला खत्म कर ली। पंजाब के अमृतसर में एक अधेड़ दंपती ने तो इस डर से जहर खा कर जान दे दी कि आगे चल कर उनको भी कोरोना वारस का संक्रमण हो सकता है। उन्होंने अपने सुसाइड नोट में इस डर की बात लिखी थी।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक देश की 1. 30 अरब की आबादी में से नौ करोड़ से ज्यादा लोग किसी ना किसी किस्म के मानसिक अवसाद की चपेट में हैं। संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में वर्ष 2020 के आखिर तक 20 फीसदी आबादी के मानसिक बीमारियो की चपेट में आने का अदेशा जताया था। लेकिन देश में नौ हजार से कुछ ही ज्यादा मनोचिकित्सकों की वजह से हर एक लाख मरीज पर महज ऐसा एक डाक्टर ही उपलब्ध है। इससे परिस्थिति की गंभीरता का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। लांसेट साइकियाट्री में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में अवसाद और घबराहट की बीमारियों से ग्रसित लोगों की तादाद वर्ष 1990 से 2017 के बीच बढ़ कर दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।


पुणे में बहुत सारे लोग मनोचिकित्सक की सेवाएं ले रह हैं। पुणे महाराष्ट्र के उन शहरों में है जो सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां दो सप्ताह से कर्फ्यू जैसे हालात हैं। वैसे भी इस राज्य में कोरोना के मामले सबसे ज्यादा हैं। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तो सैकड़ों लोग मानसिक अवसाद की चपेट में हैं। किसी को लगातार हाथ धोने की वजह से कोरोनाफोबिया हो गया है तो किसी को छींक आते ही कोरोना का डर सताने लगता है। ऐसे कई मरीज मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों ने स्थिति को और गंभीर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि उनके पास सलाह के लिए आने वालों या फोन करने वालो में कई लोग ऐसे हैं जिनका मानसिक स्वास्थ्य पहले एकदम दुरुस्त था।


दरअसल कोरोना वायरस के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से अवसाद और चिंता के लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं। लॉकडाउन की वजह से लाखों लोग घर से काम कर रहे हैं। इसका मतलब जीवन को नए सिरे से व्यवस्थित करना है। इसका दिमाग पर भारी असर पड़ता है। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहें भी दिमाग पर प्रतिकूल असर डालती हैं।


इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के उपाध्यक्ष गौतम साहा का कहना है, "कोरोना और लॉकडाउन की वजह से मानसिक अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रोजाना सैकड़ों नए मामले भी सामने आ रहे हैं। कइयों के लिए यह लॉकडाउन उनके जीवन का सबसे अंधेरा दौर है।”


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