झारखंड में सिने कामगारों के सामने लॉकडाउन के बाद शुरू होगा असल संकट

 


मुंबई। लॉकडाउन ने झारखंड में फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों के सामने अब रोजी रोजगार की चिंता खड़ी कर दी है। 10 हजार से भी अधिक कामगार इस काम से सीधे-सीधे जुड़े हुए हैं। कोरोना आपदा में हर कोई किसी न किसी रूप से प्रभावित हो रहा है। झारखंड में फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों के सामने भी अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। लॉकडाउन में तो घरों में सिमटकर रहना जरुरी है। पर इसके बाद फिल्म निर्माण से जुड़े कार्यों में पहले की तरह रफ़्तार रह पाएगी कि नहीं, इसकी चिंता शुरू हो गयी है।



मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लॉकडाउन शुरू होने के समय झारखंड में लगभग 25 फिल्मों की शूटिंग जारी थी। झारखंडी भाषाओं में बनने वाली इन फिल्मों से कई कलाकार, टेक्निशियन और अन्य कामगार जुड़े हैं। झारखंडी फिल्म निर्माता संघ के महासचिव उमाशंकर के अनुसार राज्य के सभी 24 जिलों से हजारों लोग फिल्म सम्बन्धी कार्यों से जुड़े हुए हैं। एक-एक फिल्म निर्माण से 150 से 200 लोगों लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं। इस तरह से देखा जाये तो लॉकडाउन की स्थिति में फंसी पड़ी फिल्मों से 4-5 हजार लोग अब बेकार होकर घर बैठ चुके हैं। फ़िलहाल पूरे राज्य में 10 हजार से अधिक लोग फिल्म निर्माण कार्यों से जुड़कर रोजी रोटी चला रहे हैं।


झारखंड फिल्म निर्माता संघ के अनुसार लॉकडाउन में फ़िलहाल हजारों कामगार अपने अपने घरों में सिमट गए हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद इससे उबरने में लंबा समय लग सकता है। 3-4 माह से लेकर इस साल के अंत तक इसका प्रभाव दिखने की आशंका है। जब तक फिल्म निर्माण का काम शुरू नहीं होगा, किसी कामगार को एक भी रुपया नहीं मिल सकेगा। फिल्म निर्माता या वैसे लोग जिन्होंने फिल्म निर्माण में पैसे लगाये हैं, मंदी की आशंका के बीच संभव है कि लॉक डाउन के बाद पैसे इन्वेस्ट करने से बचें। ऐसे में फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों के सामने कठिन हालात शुरू होंगे। दूसरे राज्यों में पलायन से भी उनके लिए तुरंत कोई निदान संभव नहीं होगा। फिल्म निर्माता राजेश कसेरा के अनुसार हजारों कलाकारों को सरकार से राहत पैकेज की जरुरत होगी। झारखंडी भाषा में फिल्म निर्माण के लिए 50 फीसदी अनुदान सरकार फिल्म निर्माताओं को देती है पर इससे फिल्म निर्माण से जुड़े अन्य लोगों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता। कोरोना आपदा में कठिन स्थिति को देखते कामगारों, कलाकारों के लिए विशेष पैकेज देना ठीक रहेगा।


लॉक डाउन के कारण झारखंड के सभी जिलों में कुल मिलाकर लगभग 100  मल्टीप्लेक्स बंद पड़े हैं। इसके हटने के बाद भी वहां दर्शकों की भीड़ नहीं आनेवाली। फिल्म निर्माता उमाशंकर के अनुसार देशभर में फिल्म निर्माण का कार्य बंद पड़ा है। जब तक नयी फ़िल्में बनेंगी ही नहीं तो मल्टीप्लेक्स में दर्शक आयेंगे कहाँ से। सिनेमा और मल्टीप्लेक्स सरकार को सबसे अधिक राजस्व देते हैं।


एक फिल्म से एंटरटेनमेंट टैक्स के तौर पर 50 प्रतिशत तक का टैक्स सरकार लेती है और बाकी से मल्टीप्लेक्स संचालक, फिल्म निर्माता और फिल्म से जुड़े लोगों को लाभ मिलता है। ऐसे में जब झारखंड में फिल्मों का निर्माण बंद पड़ा है, मल्टीप्लेक्स बंद पड़े हैं तो आनेवाले समय में झालीवुड फिल्म उद्योग को कठिन दौर से गुजरना तय है। झारखंड सरकार सभी वर्ग के लिए राहत पैकेज दे रही है। फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों के मामले में भी कोई सकारात्मक पहल होने पर ही यह कोरोना आपदा से उबर सकेगा।


 


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