बुलंदियों को छूकर अमर हो गए ऋषि!

 

किसी ने सही कहा है - दुनिया में सिकंदर कोई नहीं होता, केवल वक्त सिकंदर होता है। कल और आज दो दिनों में भारतीय फिल्म जगत ने अपने दो सिकंदर खो दिए हैं। कल  इरफान खान और आज ऋषि कपूर का कैंसर की बीमारी से निधन हो गया। लेकिन अपने अभिनय से उन्होंने खुद को “अमर” कर लिया है , ये उनके फैंस कहते हैं। 

 

ऋषि कपूर अपने जमाने के चॉकलेटी हीरो के रूप में जाने जाते थे। 4 सितम्बर 1952 में जन्में ऋषि कपूर एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते थे जिसने बॉलीवुड में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे राजकपूर के पुत्र और पृथ्वीराज कपूर के पोते थे, इस कारण अभिनय तो उनके खून में ही था। 


 

स्माइली फेस, जिंदादिल अंदाज और काम करने की लगन ने ऋषि कपूर को एक ऐसा अभिनेता बना दिया जिसे भूल पाना फिल्मी जगत और उनके फैंस के लिए नामुकिन होगा। पिता की बदौलत फिल्मों में तो उन्हें मौका मिल गया लेकिन फिर अपनी मेहनत से ऋषि कपूर ने इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई और लोगों ने भी उन्हें खूब सराहा जिसकी बदौलत ऋषि कपूर ने इंडस्ट्री में बुलंदियों को छुआ। पिता राज कपूर की फिल्म “मेरा नाम जोकर" में राज कपूर के बचपन के रोल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले ऋषि कपूर ने बतौर अभिनेता “बॉबी” फिल्म में पहली बार लीड अभिनेता का रोल निभाया। इससे पहले 1971 में उन्हें बतौर बाल कलाकार “मेरा नाम जोकर” फिल्म में अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया । 


मेरा नाम जोकर भी ऋषि की पहली फिल्म नहीं थी। इससे पहले वह 'श्री 420' में छोटे बच्चे के रूप में नजर आ चुके थे, जिसकी शूटिंग के लिए नरगिस को ऋषि को बहुत सी चॉकलेट देकर मनाना पड़ा था। बालक ऋषि फिल्म के गाने 'प्यार हुआ इकरार हुआ' में भाई रणधीर कपूर और रीमा के साथ पैदल चलते नजर आते हैं। ऐसा माना जाता है कि राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर को लांच करने के लिए 'बॉबी' बनाई थी। इस बात की हकीकत बताते हुए ऋषि कपूर ने एक बार कहा था  कि 'मेरा नाम जोकर' की विफलता के बाद राज कपूर के आर्थिक हालात बिगड़ चुके थे जिसकी वजह से वह एक टॉप स्टार को फिल्म के लिए साइन नहीं कर पाए थे।  


 

'बॉबी' फिल्म में उनके साथ डिंपल कपाड़िया ने मुख्य अभिनेत्री का किरदार निभाया और दोनों की जोड़ी को लोगों ने बहुत पसंद किया। 1973 में बनी इस फिल्म के दौरान ऋषि डिंपल से प्यार करने लगे थे, वे उन्हें प्रपोज भी करना चाहते थे कि अचानक डिंपल ने अभिनेता राजेश खन्ना से शादी करके सबको चौंका दिया। इसके बाद ऋषि कपूर पूरी तरह से अपने काम में व्यस्त हो गए।  

 

ऋषि कपूर ने करीब डेढ़ सौ से भी अधिक यादगार फिल्मों में बतौर अभिनेता काम किया, ऋषि की इन फिल्मों में से करीब 92 फिल्मों में उन्होंने रोमांटिक हीरो का रोल निभाया, वहीं उनकी 36 से भी अधिक फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचाई। इस दौरान उन्होंने कई अवार्ड भी अपने नाम किये। साल 2008 में ऋषि कपूर को फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी  सम्मानित किया गया।  उन्होंने एक के बाद एक सुरपहिट फिल्में बॉबी, नसीब, प्रेम रोग(1982), कुली, सागर, तवायफ,नगीना, चांदनी, शेषनाग, अजूबा, हिना, बोल राधा बोल, दीवाना, दामिनी, श्रीमान आशिक, प्रेम रोग (1994), याराना, साजन की बाहों में, राजू चाचा,  नमस्ते लंदन, हाउसफुल-2, स्टूडेंट ऑफ द ईयर, अग्निपथ, बेवकूफियां, शुद्ध देसी रोमांस, कपूर एंड संस, मुल्क और मंटो जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने किरदार के अभिनय से लोगों को अपना दीवाना बनाया। 

अभिनय की दुनिया में तहलका मचाने के बाद ऋषि ने निर्देशन में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 1998 में अक्षय खन्ना और ऐश्वर्या राय बच्चन अभिनीत फिल्म आ अब लौट चलें निर्देशित की। 

ऋषि कपूर के जीवन से जुड़ी कुछ बातें जो शायद आप नहीं जानते:- 

- ऋषि कपूर ने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई अजमेर के मेयो कॉलेज से पूरी की।

- चॉकलेटी हीरो ऋषि कपूर के साथ करीब 20 अभिनेत्रियों ने अपने करियर की शुरुआत की या लॉन्च की गईं।

- फिल्म बॉबी में वे अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया को पसंद करने लगे थे, वे उन्हें प्रपोज भी करने वाले थे। लेकिन डिपंल की राजेश खन्ना से शादी के बाद उन्हें नीतू सिंह से प्यार हो गया।

- नीतू सिंह की मां ऋषि को पसंद नहीं करती थीं इसलिए वे ऋषि और नीतू की डेट के दौरान नीतू की कजिन को उनके साथ लगा देती थीं, शादी से पहले दोनों ने पांच साल तक एक-दूसरे को डेट किया।

- नीतू सिंह और ऋषि कपूर की पहली फिल्म “जहरीला इंसान” थी। दोनों एकसाथ करीब 12 फिल्मों में बतौर हीरो -हीराइन की  भूमिका निभाई।

- अपने आखिरी दिनों अस्पताल में इलाज के दौरान भी वे वहां के स्टाफ को हंसाते रहे, उनका मनोरंजन करते रहे।

 

 

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