देश में कोरोना वायरस की कम रिपोर्टिंग पर उठाए जा रहे हैं सवाल 

 


नई दिल्ली।  देश में कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों की तादाद को लेकर मीडिया में तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं।  बीबीसी डॉट कॉम की एक हालिया रिपोर्ट में सीधे यह संदेह ज़ाहिर करते हुए सवाल उठाया गया है कि क्या दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या कम करके बताई जा रही है या टेस्ट कम किए जा रहे हैं, जिसके कारण अब तक सामने आने वाले मामलों की संख्या रविवार तक केवल 110 ही है? दक्षिण कोरिया में हर 50 लाख आबादी पर 3692 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। इटली में हर 10 लाख आबादी पर 826 लोगों का टेस्ट किया जा रहा है। लेकिन भारत में अब तक कुछ हज़ार लोगों का ही टेस्ट हुआ है। देश में कोरोना वायरस के लिए टेस्ट करने की किट की संख्या आबादी के हिसाब से बहुत ही कम है। इस घातक बीमारी से अब तक दिल्ली में एक व्यक्ति की मौत हुई है और पूरे भारत में केवल दो लोगों ने दम तोड़ा है। लेकिन पूरी दुनिया में इस बीमारी ने अब तक 6,000 से अधिक लोगों की जान ली है।



बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर आपको बुख़ार और ज़ुकाम जैसे कोरोना वायरस के लक्षण हैं और आप सीधे दिल्ली के किसी सरकारी अस्पताल जाकर कोरोना वायरस के लिए टेस्ट कराना चाहते हैं तो आपको वापस भेज दिया जाएगा। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सचिव की सहायक डॉक्टर ऋृतु कहती हैं कि पहले कोरोना वायरस के लिए स्थापित हेल्पलाइन को फ़ोन करना पड़ेगा।


डॉक्टर ऋृतु कहती हैं, "अगर आपको कोरोना वायरस से पीड़ित होने का शक है तो आप पहले अस्पताल जाने के बजाय हेल्पलाइन को फ़ोन करें। हेल्पलाइन में लोग आपसे कई सवाल करेंगे, जैसे कि क्या आपने हाल में कोई विदेश यात्रा की थी या ऐसे किसी व्यक्ति के साथ समय बिताया था जो हाल ही में विदेश यात्रा से लौटे हैं? या फिर इस बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति से मिले थे? अगर जवाब है हाँ तो आपको अस्पताल भेज करकर टेस्ट कराया जाएगा और अगर जवाब है नहीं तो आपको टेस्ट के लिए नहीं भेजा जाएगा।"



दिल्ली के महारानी बाग़ की एक महिला स्वाति कुछ दिन पहले बुख़ार और खांसी से पीड़ित होने के बाद राम मनोहर लोहिया अस्पताल गईं ताकि कोरोना वायरस का टेस्ट करा सकें। वो एक ग़रीब परिवार से है और हाल ही में बिहार से लौटी थी। उनका टेस्ट नहीं किया गया। अस्पताल वालों ने ये कहकर वापस भेज दिया कि 'उन्होंने विदेश यात्रा नहीं की थी और बुख़ार-खांसी होने से ज़रूरी नहीं कि कोरोना वायरस हो।'' स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना वायरस का टेस्ट करने की सरकार की इस प्रणाली से चिंतित हैं। उनके अनुसार एक अरब से अधिक आबादी वाले देश भारत में टेस्ट बहुत कम किए जा रहे हैं।


एशिया और ओशिनिया में चिकित्सा संघों की संस्था के अध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल इस तरीके से असहमत हैं। वो कहते हैं, "ये तरीक़ा रेस्ट्रिक्टिव (सीमित करने वाला) है। दक्षिण कोरिया, हांगकांग और सिंगापुर में लिबरल (उदार) तरीक़ा अपनाया गया है जहाँ कोरोना वायरस के लक्षण वाले हर मरीज़ का सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत टेस्ट किया जाता है।"


तो क्या इस बात की संभावना है कि भारत में कोरोना वायरस की रिपोर्टिंग कम करके बताई जा रही है? डॉक्टर अग्रवाल कहते हैं, "मैं ये नहीं कहूंगा। कम करके बताने का मतलब ये हुआ कि अगर मामले 100 हैं तो आप 60 की जानकारी दे रहे हैं। यहां तो टेस्ट ही कम कराए जा रहे हैं जिसके कारण कम मामले सामने आ रहे हैं।" डॉक्टर अग्रवाल का अनुमान है कि अगर भारत दक्षिण कोरिया का मॉडल अपनाए तो मामलों की संख्या 5000 तक पहुंच सकती है।


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