अमिताभ के सिनेमाई सफर पर एक और अहम किताब


लोग उन्हें भारतीय सिनेमा का पर्याय कहते हैं। उनके प्रशंसक दुनियाभर में फैले हैं और ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है, जो उन्हें सदी का महानायक कहते हैं। चाहने वाले उन्हें बिग बी के नाम से भी पुकारते हैं। जाहिर है, यह चर्चा अमिताभ बच्चन को लेकर है। एक कलाकार के तौर पर भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन का कद इतना बड़ा है कि कोई एक किताब या कोई ग्रंथ उनके व्यक्तित्व और उनके सिनेमाई सफर को ठीक से बयान नहीं कर सकता। सत्तर के दशक में आई अपनी पहली कामयाब फिल्म ‘जंजीर‘ से लेकर हाल ही दादा साहेब फालके अवार्ड हासिल करने तक- अमिताभ बच्चन ने पांच दशकों के अपने सफर में अनेक महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं। उन्होंने अनेक ऐसे किरदार निभाए, जो उनके प्रशंसकों के जेहन में हमेशा-हमेशा के लिए कायम हो गए हैं। हमारे समय के बेहतरीन अभिनेता के तौर पर अमिताभ ने फिल्म उद्योग में एक ऐसी लंबी और कामयाब पारी खेली है, जिसकी ख्वाहिश हर कलाकार के मन में कहीं ना कहीं दबी होती है और बहुत थोड़े से कलाकार अपनी इस ख्वाहिश को पूरा कर पाते हैं।



आज उनकी कामयाबी और लोकप्रियता सिनेमाई परदे से निकलकर टेलीविजन और दूसरे तमाम माध्यमों तक फैल गई है और आज फिल्मों में भले ही वे कम नजर आएं, पर विज्ञापनों के माध्यम से आप उन्हें अक्सर टेलीविजन के पर्दे पर चहलकदमी करते पाएंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता ने भी लोगों को हैरानी में डाल रखा है। अमिताभ बच्चन की इसी कामयाब और बेहतरीन पारी को आधार बनाकर यूं तो अनेक लेखकों और विश्लेषकों ने उन पर किताबें लिखी हैं, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि अमिताभ की शख्सियत को किसी एक किताब में समेटना बेहद मुश्किल है। 
प्रदीप चंद्र और विकासचंद्र सिन्हा रचित किताब ‘अमिताभ बच्चनः ए कैलाइडोस्कोप‘ इसी सिलसिले में एक और अहम कड़ी साबित होती है। हाल ही बाजार में आई इस किताब में अमिताभ के पांच दशकों तक फैले कॅरियर और इस दौरान निभाए गए किरदारों का विश्लेषण किया गया है और इन अर्थों में यह किताब दूसरी तमाम किताबों की तुलना में अलहदा नजर आती है। इस पुस्तक में उनके जीवन और कार्य दोनों के कुछ मुख्य पहलुओं को समेटने का प्रयास किया गया है। पुस्तक के 16 अध्याय हैं, प्रत्येक अध्याय का नाम उनकी फिल्मों के नाम पर रखा गया है। 
‘अमिताभ बच्चनः ए कैलाइडोस्कोप‘ इस मेगास्टार के आम प्रशंसक के दृष्टिकोण को अनुकरण करने की कोशिश करती है। अंग्रेजी मुहावरे में कहें, तो यह अपने दौर के सबसे चर्चित और कामयाब अभिनेता के जीवन का ‘360 डिग्री व्यू‘ प्रदान करने का प्रयास करती है।
प्रदीप चंद्र की यह पांचवीं पुस्तक है और अमिताभ बच्चन पर दूसरी। वे पेशे से फोटोग्राफर हैं और उनकी गिनती देश के अग्रणी फोटो पत्रकारों में होती है। इस लिहाज से ‘अमिताभ बच्चनः ए कैलाइडोस्कोप' में आपको अमिताभ के अनेक ऐसे फोटोग्राफ मिलते हैं, जिनमें एक नया एंगल और इस अभिनेता का एक अलग लुक आपको नजर आता है। सह लेखक विकासचंद्र सिन्हा आईआईटी, दिल्ली और आईआईएम, अहमदाबाद के स्नातक हैं और उनकी यह पहली किताब है। अपने परिचय में वे साफ स्वीकार करते हैं कि वे अमिताभ के प्रशंसक हैं। जाहिर है कि अमिताभ बच्चन के जीवन को पूरी तरह समझने की उनकी यह यात्रा अपने पसंदीदा सितारे को बेहद करीब से जानने-समझने की उत्कंठा के साथ पूरी हुई है। दुर्लभ और कभी न देखी गई तस्वीरों, सुंदर चित्रों, रेखाचित्रों और फिल्म स्टिल्स के संग्रह के साथ, यह पुस्तक अमिताभ के हर प्रशंसक की लाइब्रेरी के लिए जरूरी है।
‘अमिताभ बच्चनः ए कैलाइडोस्कोप‘
लेखक - प्रदीप चंद्र, विकासचंद्र सिन्हा
कुल पेज - 410/मूल्य - 1500 रुपए
प्रकाशक - नियोगी बुक्स, ब्लाॅक डी, बिल्डिंग नंबर 77
ओखला इंडस्ट्रियल एरिया फेज वन
नई दिल्ली - 110020


 


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