क़िताब में समेटा पंजाबी सिनेमा के समृद्ध इतिहास को

 


जयपुर।  फिल्म हिस्टोरियन भीम राज गर्ग द्वारा लिखित पंजाबी सिनेमा के इतिहास की विस्तृत जानकारी देती पुस्तक ‘द इलस्ट्रेटेड हिस्ट्री ऑफ पंजाबी सिनेमा-1935-1985’ का हाल ही चंडीगढ़ में विमोचन हुआ। लेखक भीम राज गर्ग ने अपनी इस पुस्तक के बारे में बताया कि छोटी उम्र से ही उन्हें पंजाबी फिल्में देखने व गीत सुनने का शौक था। अक्सर रेडियो पर गीत सुन कर फिल्मों के बारे में विस्तृत जानकारी पाने को उत्सुक हो जाते थे। इसी जिज्ञासा ने उन्हें पंजाबी सिनेमा के इतिहास पर खोज करने को प्रेरित किया, लेकिन जब कोई पुस्तक नहीं मिली उन्होंने इस विषय पर पुस्तक लिखने की ठानी, ताकि आने वाली पीढ़ियों को पंजाबी सिनेमा के इतिहास की जानकारी दी जा सके।



गर्ग ने बताया कि उनकी मुलाकात फिल्म इतिहासकार फिरोज रंगूनवाला से हुई और उनकी प्रेरणा से 1983 में उन्होंने पंजाबी फिल्मों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। उन्होंने नेशनल आर्काइव्स आफ इंडिया, द टिब्यून चंडीगढ़, फिल्म एंड टेलेविजन इंस्टीट्यूट पूणो, रिसर्च एंड रेफरेंस डिविजन, सेंसर बोर्ड आदि के कार्यालयों से भी जानकारियां जुटाई। पंजाबी सिनेमा के पितामह केडी मेहरा, बीआर चोपड़ा, रामानंद सागर, अनिल विश्वास, सुरेंदर नाथ, प्रेम चोपड़ा, मेहर मित्तल, विजय टंडन जैसी सैकड़ों फिल्मी हस्तियों से भी बातचीत की।


इन सब से जुटाई जानकारियों के आधार पर उन्होंने पंजाबी फिल्मों के पहले 50 साल की 221 फिल्मों को इस पुस्तक में शामिल किया है। पुस्तक में पहली पंजाबी फिल्म 1935 में आई ‘इश्क-ए-पंजाब’ से वर्ष 1985 में आई अंतिम फिल्म ‘वैरी जट्ट’ के बारे में सचित्र जानकारियां हैं।


भीम राज गर्ग ने बताया कि यह खोज व पुस्तक छपवाने का काम उन्होंने मात्र अपने शौक के कारण किया है। वह रिजर्व बैंक आफ इंडिया से बतौर असिस्टेंट जनरल मैनेजर सेवानिवृत्त हुए हैं और यह सारा काम वह शाम पांच बजे से रात दो बजे के बीच करते रहे हैं। अब भी वह रात दो से सुबह सात बजे तक ही सोते हैं और पुस्तक के अगले अंक के लिए काम में जुटे हैं। आने वाले अंक में 1986 से 2018 तक की फिल्मों की जानकारी रहेगी। उन्होंने किताब को 1983 में लिखना शुरू किया था। इन 36 सालों के दौरान उन्होंने पंजाबी सिनेमा का बारीकी से अध्ययन किया है।


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