शाजी एन. करुण के नाम होगा जिफ लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड

जयपुर।  जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत 17 जनवरी को  महाराणा प्रताप ऑडिटोरियम में होगी। शाम पांच बजे ओपनिंग सेरेमनी होगी, जहां जाने – माने फिल्म अभिनेता प्रेम चोपड़ा को जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2020 की ओर से एवरग्रीन स्टार अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जाएगा। वहीं, पद्मश्री शाजी एन. करुण  के नाम होगा जिफ – आउटस्टैंडिंग लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2020।

जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ट्रस्ट और आर्यन रोज़ फाउण्डेशन की ओर से आयोजित जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल [ जिफ] का आयोजन  17 से 21 जनवरी के दौरान होगा।  इस वर्ष जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में फिल्मों का प्रदर्शन शहर के आयनॉक्स सिनेमा हॉल [गौरव टावर] में होगा। वहीं, सिनेमा जगत् से जुड़ी विविध चर्चाओं और संवाद कार्यक्रमों का आयोजन शहर के क्लार्क्स  आमेर होटल और अन्य स्थानों पर होगा। जिफ 2020 में 69 देशों से आई 240 फिल्मों का प्रदर्शन होगा।

कई नेशनल अवॉर्ड्स पा चुके शाजी एन. करुण
1 जनवरी 1952 को जन्मे शाजी एन. करुण  एक जाने – माने फिल्म निर्देशक और सिनेमेटोग्राफर हैं। ये केरला स्टेट चलचित्र एकेडमी के प्रीमियर चेयरमैन रहे हैं। गौरतलब है कि यह एकेडमी भारत की पहली फिल्म और टीवी एकेडमी है। वहीं,1998 से 2001 तक ये इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरला के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रहे हैं। शाजी एन. करुण  पिरावी, स्वहम्, वानप्रस्थम् और कुट्टी स्रंक जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। इनकी डेब्यू फिल्म पिरावी [1988] कान्स फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड हासिल कर चुकी है। पिरावी के लिए इन्हें नेशनल अवॉर्ड फॉर बेस्ट डायरेक्शन भी मिल चुका है। इतना ही नहीं, कुट्टी स्रंक और वानप्रस्थम को बेस्ट फिल्म के लिए नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। वे केरल स्टेट फिल्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन हैं। 



380 से अधिक फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं प्रेम चोपड़ा
23 सितम्बर 1935 को जन्मे प्रेम चोपड़ा भारतीय सिनेमा का एक बहुत लोकप्रिय चेहरा हैं। उन्होंने लगभग 60 बरसों में 380 से अधिक फिल्मों में काम किया है। राजेश खन्ना की कई प्रसिद्ध फिल्मों में इन्होने मुख्य विलेन [खलनायक] का किरदार निभाया है, जिसे आज तक दर्शक और आलोचक सराहते और याद करते हैं। लाहौर में जन्मे और बाद में शिमला में पढ़े प्रेम चोपड़ा की अभिनय में रुचि कॉलेज के दिनों से ही शुरू हो गई थी। परिवार को नापसंद होने के बावजूद ये अपने सपनों को लेकर पक्के थे, और फिर बॉलीवुड में अपनी किस्मत आज़माने के लिए ये मुम्बई चले गए। संघर्ष के दिनों में इन्होने अख़बार में भी काम किया और साथ ही फिल्मों में भी काम करते रहे। वर्ष 1967 में उपकार फिल्म के बाद इनकी पहचान बनने लगी और फिर इन्हें पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। 




ग़र फिल्मों पर नज़र डालें, तो प्रेम चोपड़ा ने शहीद, वो कौन थी, उपकार, दो रास्ते, दो अनजाने, कटी पतंग, काला सोना, दोस्ताना, क्रांति, ऊंचे लोग, जानवर, निशान, पूनम की रात, तीसरी मंजिल, फूल बने अंगारे, प्रेम पुजारी, यादगार, हिम्मत, पूरब और पश्चिम, कीमत, अजनबी, बेनाम, पॉकेट मार, दो जासूस, ड्रीम गर्ल, दिल और दीवार, देस परदेस, आज़ाद, दूल्हे राजा, अनाड़ी नं 1, लाल बादशाह, कोई मिल गया, बंटी और बबली, धमाल, डैडी कूल, पटियाला हाउस जैसी फिल्मों में अभिनय किया। चोपड़ा मानते हैं कि उनकी सबसे बेहतरीन फिल्में रहीं – कुंवारी, सिकंदर – ए – आज़म, शहीद, जादू टोना और चोरी – चोरी चुपके – चुपके।

प्रेम चोपड़ा मानते हैं कि वे हीरो बनने मुम्बई आए थे, हालांकि दर्शकों ने उन्हें विलेन के तौर पर बहुत पसंद किया और खलनायक के रूप में ही भारतीय सिनेमा में इनकी पहचान बनी। वर्ष 1976 में इन्हें फिल्म दो अनजाने के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर अवॉर्ड मिला। प्रेम चोपड़ा की बेटी रितिका नन्दा ने इनकी आत्मकथा भी लिखी है, जिसका टाइटल है - प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा
 


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