जिफ के दूसरे दिन हुआ जयपुर फिल्म मार्केट का उद्घाटन

 


जयपुर। जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन सिनेमाई रंगों से सराबोर रहा। फिल्मों की दुनिया के विविध पक्षों पर संवाद आयोजित हुए। शनिवार को सबसे ख़ास रहा जयपुर फिल्म मार्केट का उद्घाटन। गौरतलब है कि जयपुर इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-जिफ 2020 पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार के सहयोग से 21 जनवरी तक आयनॉक्स सिनेमा हॉल, जी.टी. सेन्ट्रल और होटल क्लाक्स आमेर में आयोजित हो रहा है।



होटल क्लार्क्स  आमेर में सुबह 11 बजे जयपुर फिल्म मार्केट का उद्घाटन समारोह हुआ। अभिनेत्री दीया डे ने मंच संचालन किया, वहीं सत्र में सिने जगत की हस्तियां – फैडरेशन ऑफ इंडिया और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट और जाने – माने प्रोड्यूसर टी.पी.अग्रवाल, डायरेक्टर और सिनेमेटोग्राफर पद्म श्री शाजी एन करुण, असोका, मैं हूं ना के संवाद और वॉर और 2.0 फिल्म के गीत लेखक अब्बास टायरवाला, आइनॉक्स के सी.एम.ओ. सौरभ वर्मा, शॉर्ट्स टीवी, यू.एस.ए. के प्रमुख कार्टर पिल्चर, ऑस्ट्रेलिया के फिल्मकार एंड्रयू वाइले, अभिनेता पैनिगिओटिस सिम्प्रस और फिल्म मेकर सौरभ विष्णु मौजूद रहे।


सत्र की शुरुआत करते हुए टी.पी.अग्रवाल ने कहा कि जिफ दुनिया के बेहतरीन फेस्टिवल्स में गिना जाता है। फिल्म समारोह में अब ज्यादा से ज्यादा प्रोड्यूसर्स और फिल्म मेकर्स आने लगे हैं। फिल्म निर्माता चाहते हैं कि उनकी फिल्में जिफ में स्क्रीनिंग के लिए चुनी जाए। जिफ फाउंडर डाइरेक्टर हनु रोज ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। जिफ के सी.ई.ओ. कर्नल सुनील धीर ने फिल्म समारोह की सफलता के पीछे काम करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। उन्होने विशेष रूप से पर्यटन विभाग को धन्यवाद दिया। 


उद्घाटन सत्र की अगली कड़ी में दोपहर 12 बजे जर्नी एण्ड चैलेंज - इंडियन एंड ग्लोबल फिल्म इंडस्ट्री पर सैशन हुआ, जिसमें टी.पी.अग्रवाल, शाजी एन. करुण ,  अब्बास टायरवाला और सौरभ वर्मा ने अपनी बात रखी। फिल्म मेकर क्षितिज शर्मा ने मॉडरेटर की भूमिका निभाते हुए फिल्मों के कॉमर्शियल पक्ष से जुड़े सवाल किए। शाजी एन. करुण  ने कहा कि डिजिटल मीडिया तेजी से बढ़ रहा है, और ऐसे में फिल्मों को लोगों तक पहुंचाना आसान होता जा रहा है। वहीं, अब्बास टायरवाला ने कहा कि फिल्मों में बहुत प्रयोग हो रहे हैं और वे इस बात को लेकर बहुत उत्सुक हैं कि आने वाले वक्त में सिनेमा कैसा रंग लेगा। वहीं, फिल्मों के कॉमर्शियल पक्ष पर अपनी बात रखते हुए आईनॉक्स के सी.एम.ओ. सौरभ वर्मा ने कहा कि सिनेमा हॉल्स की संख्या बढ़ रही है, और यह भरपूर कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को थिएटर तक लाया जाए। यही कारण है कि थियेटर्स में फूड और गेम जोंस के नए – नए प्रयोग हो रहे हैं। साथ ही उन्होने यह भी कहा कि यह समय स्टोरी टैलर्स के लिए बहुत अच्छा है, और उनके लिए बहुत सारे ओपन प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। फिल्में बनाने और अच्छी कहानियां कहने के लिए यह सबसे बेहतरीन समय है।


Popular posts from this blog

देवदास: लेखक रचित कल्पित पात्र या स्वयं लेखक

नई चुनौतियों के कारण बदल रहा है भारतीय सिनेमा

वैश्विक गायक मुकेश पर ‘सान्निध्य लंदन’ ने किया विशेष अन्तरराष्ट्रीय सभा का आयोजन