15 जनवरी तक सामने आ सकते हैं सोशल मीडिया को रेगुलेट करने के नियम

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली फेक खबरों पर लगाम लगाने के सिलसिले में केंद्र सरकार 15 जनवरी तक नए नियमों को जारी कर सकती है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार सरकार ऐसे कड़े नियमों का खाका खींच रही है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को और भी बेहतर तरीके से रेगुलेट किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में केंद्र सरकार ने 15 जनवरी तक का समय मांगा था, लिहाजा उम्मीद है कि इस समय सीमा में नए नियम लागू हो जाएंगे।



सूचना प्रसारण मंत्रालय की तरफ से कहा गया था, 'फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सोशल मीडिया सर्विस प्रोवाइडर्स को जिम्मेदार ठहराया जाए या नहीं, इस पर विचार किया जाएगा, लेकिन कोशिश होगी कि मामले के सभी पक्षों को कवर किया जाए। सरकार 15 जनवरी 2020 तक सोशल मीडिया को रेगुलेट करने के लिए नियम बनाकर सोशल मीडिया प्रोवाइडर्स को नोटिफाई करेगी।' दरअसल सरकार का मानना है  कि टेक्नोलॉजी से एक तरफ जहां आर्थिक विकास में काफी योगदान मिला है, वहीं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच, फेक न्यूज, पब्लिक ऑर्डर और देश विरोधी गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है, इसलिए इन्हें रेगुलेट करने के लिए सख्त कदम उठाने जरूरी हैं।


दरअसल, पिछले साल जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने सरकार को तीन हफ्ते के अंदर सोशल मीडिया का दुरुपयोग रोकने के लिए गाइडलाइन जारी करने के लिए कहा था। इस विषय पर अब तक कई जनहित याचिकाएं  दायर की जा चुकी हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट को सरकार को निर्देश देना चाहिए कि सोशल मीडिया अकाउंट के लिए आईडी कार्ड अनिवार्य कर दिया जाए। इससे सोशल मीडिया अकाउंट पर लोगों की विश्वसनीयता सामने आएगी।


सुप्रीम कोर्ट जनवरी के आखिरी सप्ताह से इस पर सुनवाई शुरू कर सकता है। गौरतलब है कि कोर्ट ने सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने से संबंधित मद्रास, मध्य प्रदेश और बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं को पिछले साल अपने पास मंगा लिया था। अब इन याचिकाओं पर जनवरी के आखिरी में सुनवाई हो सकती है। 


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