सी ए ए के बाद मोदी सरकार ने दी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को मंजूरी

 


नई दिल्ली।  नागरिकता संशोधन कानून (सी ए ए ) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एन आर सी ) को लेकर देश में मचे बवाल के बीच अब केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एन आर पी ) को मंजूरी दे दी है। इसके तहत देश भर के नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडेकर ने मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए कहा कि एनपीआर हर दस साल पर अपडेट होता है। उन्होंने कहा, “पहली बार इसे साल 2010 में यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार ने अपडेट किया था, अब इसे दस साल बाद हम अपडेट कर रहे हैं। यानी साल 2020 में। हम कुछ भी नया नहीं कर रहे हैं।”



 


उन्होंने कहा कि एनपीआर के लिए किसी तरह के कागजात या सबूत नहीं ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई दस्तावेज नहीं मांग रहे हैं। बायोमैट्रिक भी नहीं मांगा जा रहा है, स्वसत्यापन माना जाएगा। हमें अपनी जनता पर पूरा यकीन है। जो जनता कहे वही सही है।” उन्होंने कहा कि एनपीआर में जनगणना का काम ऐप के ज़रिये किया जाएगा। अगले साल अप्रैल से इस पर काम होगा।


उन्होंने कहा कि एनपीआर से सरकारी योजनाओं के सही लाभार्थियों की पहचान हो पाएगी और यह भी पता चल पाएगा कि योजना का लाभ उन तक पहुंच रहा है या नहीं? जावड़ेकर ने कहा, 'आयुष्मान, उज्ज्वला, सौभाग्य जैसी योजनाओं के लिए लाभार्थियों की पहचान होगी। सभी और सही लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचे, यह सुनिश्चित हो सकेगा।'


उन्होंने बताया कि बंगाल, तमिलनाडु, ओडिशा, मणिपुर में पीडीएस (सर्वम) के लिए एनपीआर में दर्ज जानकारी उपयोग में लाई गई। वहीं, राजस्थान में भामाशाह योजना के लिए भी इसका इस्तेमाल हुआ। जावड़ेकर ने कहा कि इसके कई अन्य फायदे भी हैं। बहरहाल, कैबिनेट ने इस पूरी कवायद के लिए 8,700 करोड़ रुपये के बजट आवंटन पर भी मुहर लगा दी है।


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