राजस्थान की समकालीन हिन्दी कहानी पर विचार मंथन

 

जयपुर। समाज के सामने जो चुनौतियां हैं, उन्हें समझना जरूरी है। साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन करना नही है। लेखक का संकल्प ही लेखक को प्रासंगिक बनाता है।  यह उदगार बीकानेर के श्री डूंगरगढ़ में राष्ट्र भाषा हिन्दी प्रचार समिति एवं राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राजस्थान की समकालीन हिन्दी कहानी समारोह के दौरान मुख्य अतिथि प्रख्यात लेखक और राजस्थान में प्रगतिशील आंदोलन के पुरोधा वेद व्यास ने व्यक्त  किए।


संस्कृति भवन में हुए समारोह में व्यास ने कहा कि इस तकनीकी दौर में लेखकों का आपसी संवाद समाप्त हो गया है। साहित्य बाजार, मनोरंजन व सुविधा की ओर जा रहा है और साहित्य की दिशा ही बदलती जा रही है। अध्यक्षता करते हुए श्रीगंगानगर की नीलप्रभा भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि कहानी एक महत्वपूर्ण विद्या है, जो लेखक के शब्द संवेदना से  प्रेरणादायी होती है। कहानी के माध्यम से आम लोगों को आजादी से जीने की राह दिखाई जाती है।

विशिष्ट अतिथि जयपुर के संदीप मील ने कहा कि कहानी अनन्त है फिर भी इनको शब्दों में बांध रखा है। आज आत्ममुग्धता का दौर है, जिसमें व्यक्ति अपनी कहानी के अलावा दूसरे की कहानी पढने में रूचि कम लेता है। जयपुर के सांवरसिंह यादव ने कहा कि राजस्थान की धरती कहानी की उपजाऊ भूमि है। संस्था अध्यक्ष श्याम महर्षि ने कहा कि कहानी साहित्य में उदारता, नैतिकता, सहिष्णुता का भण्डार है, जो समाज के लिए आवश्यक है। हिन्दी की कहानी मील का पत्थर साबित हुई है।

उद्घाटन सत्र में आधार वक्तव्य देते हुए झुंझुनूं के डॉ. नरपत सिंह सोढा सोढ़ा ने बताया कि कहानियों में उमंग व उल्लास जरूरी है। इसके बिना कहानी लिखना अलगाववाद को बढ़ावा देना है। कहानी मानव जीवन के विभिन्न मनोवैज्ञानिक पहलुओं को उजागर करने में सफल होती है। साहित्यकार रवि पुरोहित ने संस्था की कार्य योजना के बारे में अवगत करवाया।

इसी समारोह के दौरान रेणुका व्यास ने सामाजिक और व्यवस्थायिक विद्रूप की अभिव्यक्ति और राजस्थान की हिन्दी कहानी पर अपने उद्गारों की अभिव्यक्ति दी। राजेन्द्र शर्मा मुसाफिर ने राजस्थान की हिन्दी कहानी स्त्री संघर्ष की दास्तान पर अपना पत्र वाचन किया। ओमप्रकाश पिलानियां, डॉ. मदन सैनी, रेणुका व्यास, डॉ. सन्तोष विश्नोई, दीलिप केसानी, डॉ. उषा किरण सोनी, दीलिप पुरोहित, इंजी. आशा शर्मा, डॉ. साधना जोशी  ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर रामचन्द्र राठी, डॉ. चेतन स्वामी, डॉ. मदन सैनी, बजरंग शर्मा, श्यामसुन्दर आर्य, भंवलाल भोजक, सत्यनारायण योगी, सत्यदीप, महावीर माली, श्रीभगवान सैनी, गोपीराम नाई, दयाशंकर शर्मा आदि उपस्थित थे।

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