नृत्य नाटिका ‘द गेम ऑफ डाइस' में जीवंत हुआ महाभारत का रोचक प्रसंग

 


जयपुर। जवाहर कला केंद्र में पांच दिवसीय फेस्टिवल 'विविधा 2' के अंतिम दिन शुक्रवार को कंटम्प्रेरी नृत्य नाटिका 'द गेम ऑफ डाइस' की बेहतरीन प्रस्तुति दी गई। कोलकाता के संतोष नायर व ग्रुप साध्य द्वारा प्रस्तुत की गई इस अनूठी कंटम्प्रेरी नृत्य नाटिका में दर्शकों के समक्ष महाभारत के एक प्रसंग को नए एवं रोचक अंदाज में पेश किया गया। यह नृत्य नाटिका कथकली और मयूरभंज छऊ पर आधारित कंटम्प्रेरी नृत्य में बहुत खूबसूरती से पेश की गई।


इस प्रस्तुति के विविध तत्वों को महाभारत के एक आकर्षक प्रसंग- 'द गेम ऑफ डाइस' के जरिए साकार किया गया। जिसमें महाभारत के एक षड़यंत्र, एक नाटकीय संरचना व बहुआयामी किरदारों के साथ-साथ विशेष संदेश भी शामिल किए गए, जिनकी वर्तमान दौर में भी प्रासंगिकता है। इस प्रस्तुति में जहां कथकली के जरिए नाटकीय व जीवंत दृष्टिकोण पेश किया गया। साथ ही, मयूरभंज छऊ की ऊर्जा व मार्शल आर्ट को जोड़ा गया। इसी प्रकार कंटम्प्रेरी नृत्य के माध्यम से रचनात्मकता और प्रयोगात्मक विधि का संयोजन देखने को मिला।



हालांकि इस प्रस्तुति की विषय वस्तु महाभारत पर आधारित थी, लेकिन इसे आधुनिक शैली में इस तरह प्रस्तुत किया गया कि इसका जुड़ाव सीधे दर्शकों से बन गया। इसमें पात्रों के भावों व उनके संघर्ष ने आम आदमी के आंतरिक संघर्ष का एहसास कराया। प्रायोगिक संगीत व वेशभूषा से प्रस्तुति को अनूठापन व नया रूप मिला।


कलाकारों में नेहा शर्मा, हिमेश पारचा, साहुल भाटिया, पंकज सिंह, सत्यम खनगवाल, सुशांत नायर, सुमित कुमार, सुधीर कुमार, दिनेश बाली व संतोष नायर के नृत्य कौशल और भावाभिव्यक्ति ने दर्शकों के दिल को छू लिया। इसकी कोरियोग्राफी संतोष नायर की रही, जबकि संगीत शरत चंद्र श्रीवास्तव ने दिया। लाइट व डिजाइन मिलिंद श्रीवास्तव और प्रोडक्शन नलिनी शर्मा का रहा।


उल्लेखनीय है कि संतोष नायर कलाकारों के परिवार से हैं, और वे पारंपरिक व आधुनिक भारतीय नृत्य के रूपों में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। वे गत 30 वर्षों से नृत्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।


 


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