कुटियाट्टम एवं नवरस साधना पर वर्कशॉप का आयोजन



जयपुर, 17  नवंबर। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में चल रही 7 दिवसीय कुटियट्टम और नवरस साधना वर्कशॉप में लगभग 22 थिएटर एवं नृत्य कलाकार भाग ले रहें हैं। वर्कशॉप में ये कलाकार पारंपरिक भारतीय थिएटर के 'कुटियट्टम' स्वरूप की समृद्ध विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहें हैं। वर्कशाप के प्रतिभागियों को कुटियट्टम विशेषज्ञ, कपिला वेणु द्वारा प्रसिद्ध विद्वान, श्री जी. वेणु द्वारा डिजाइन की गई 'अभिनय तकनीक' सिखाई जा रही है। 
वर्कशॉप की जानकारी देते हुए सुश्री वेणु ने कहा कि इसमें प्रतिभागी कुटियट्टम के मूल तत्वों जैसे विभिन्न हस्त मुद्राएं और हाथों एवं नेत्रों के तारतम्यता के बारे में सीखा रहे हैं । 'नवरस साधना' उन लोगों के लिए उपयुक्त है, जो विभिन्न नृत्य एवं नाट्य शैली जानने के बावजूद अपनी भाव-भंगिमाओं को नये आयाम देना चाहते हैं। यह कलाकार को उसके भावों को प्रस्तुत करने में मदद करता है। कुटियट्टम का प्रशिक्षण कलाकार के शरीर को ऊर्जावान बनाने और मंच पर उसकी प्रस्तुति सुधारने में मदद प्रदान करता है। यह कलाकार को आंखों के महत्व एवं भूमिका को समझने में भी सहायक होता है, जिसके लिए कलाकार को किसी भी प्रस्तुति में आंख की विभिन्न संभावनाओं के बारे में जान पाता है।
देश में कुटियट्टम की वर्तमान स्थिति की बात करते हुए, सुश्री वेणु ने बताया कि वर्तमान में देश में कुटियट्टम के बहुत कम कलाकार होने के बावजूद यह अच्छी स्थिति में है। कलाकार को यह एहसास होना चाहिए कि यह बेहद गहरा एवं गंभीर स्वरूप है, जो प्रसिद्धि पाने के लिए नहीं है। इसकी तुलना ध्रुपद कला स्वरूप से इस संदर्भ में की जा सकती है कि जो लोग इस शैली को पसंद करते हैं, वे सिर्फ इसकी ही प्रस्तुति देते हैं। दुनिया भर के बहुत सारे थिएटर कलाकार कुटियट्टम में दिलचस्पी ले रहे हैं।
वर्कशॉप के समापन पर स्टूडेंट्स द्वारा एकल एवं समूह प्रस्तुति दी जाएगी, जिसके जरिए यह आकलन किया जाएगा कि उन्होंने कुटियट्टम के बारे में क्या सीखा है और उनके यह शैली सीखने में क्या अनुभव रहे हैं।


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