कैसे-कैसे मंजर सामने आने लगे हैं....

 


तीन दशकों की अवधि में बॉलीवुड में सौ से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले संजय दत्त ने फिल्म 'रॉस्कल्स' के जरिए बतौर निर्माता अपना नया सफर शुरू किया।  दिलचस्प यह है कि 'रॉस्कल्स' एक विशुद्ध कॉमेडी फिल्म है और इसके लिए इतना बताना ही बहुत होगा कि इसके निर्देशक हैं डेविड धवन, जो 'आंखें', 'बीवी नंबर 1', 'कुंवारा', 'जोड़ी नंबर 1', 'शादी नंबर 1' और 'पार्टनर' जैसी औसत दर्जे की कॉमेडी फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। वे पिछले बीस साल से इंडस्ट्री में हैं और इस दौरान गोविंदा, सलमान खान, अनिल कपूर और संजय दत्त जैसे सितारों के साथ पच्चीस से ज्यादा फिल्में बना चुके हैं। कादर खान, जॉनी लीवर और शक्ति कपूर ने उनकी फिल्मों में फूहड़ कॉमेडी के नए तरीके ईजाद किए और ऐसा लगता था कि निर्देशक ने इन मसखरों को कैमरे के सामने कुछ भी करने की छूट दे दी है। आज शायद ही कोई कलाकार गर्व के साथ यह कहना चाहे कि उसने डेविड की फिल्मों में काम किया है। 'पार्टनर' के बाद डेविड भी थोड़े समय के लिए खामोश हो गए थे, लेकिन अब माहौल और मिजाज को देखकर वे फिर से मैदान में आ डटे हैं।


हिंदी सिने उद्योग को दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री माना जाता है और हर साल यहां अलग-अलग जॉनर की डेढ़ सौ से ज्यादा फिल्में बनती हैं। एक मिथक यह है कि बॉलीवुड के फिल्मकार सबसे ज्यादा रोमांटिक सिनेमा बनाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह एक जॉनर ऐसा है, जो हर दौर में कामयाब रहा है। लेकिन मौजूदा दौर कॉमेडी फिल्मों का है। इसकी वजह यह है कि 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' जैसी रूमानी फिल्में बार-बार नहीं बना करतीं और 'गुजारिश' जैसी बेहद खूबसूरत फिल्मों की मखमली रूमानियत को दर्शक पहचान ही नहीं पाते। ऐसे दौर में कॉमेडी का पिटारा लेकर चलने वाले फिल्मकार चांदी कूट रहे हैं और हास्य के नाम पर फूहड़ फिल्में दर्शकों के सामने परोस रहे हैं। शुक्र है कि ऋषिकेश मुखर्जी जैसे फिल्मकार अब इस दुनिया में नहीं हैं, वरना हास्य फिल्मों की फूहड़ता और मसखरेपन को देखकर वे भी अपना सिर धुनने लगते। शेक्सपीयर की कृति 'कॉमेडी ऑफ एरर्स' पर तीस साल पहले 'अंगूर' जैसी गुदगुदाने वाली साफ-सुथरी कॉमेडी फिल्म बनाने वाले गुलजार ने भी अपना रास्ता बदल लिया है। यह शायद गुलजार के लिए बुरी खबर हो सकती है कि रोहित शेट्टी ने अब 'अंगूर' का रीमेक बनाने का इरादा जाहिर किया है, जिसमें संजीव कुमार वाला रोल शाहरुख खान करेंगे और देवेन वर्मा का रोल तुषार कपूर निभाएंगे। मौसमी चटर्जी का रोल करीना कपूर के हिस्से आया है, हालांकि करीना के स्वभाव में मौसमी जैसा अल्हड़पन और वैसी मासूमियत नहीं है। और रोहित शेट्टी 'अंगूर' के साथ   इंसाफ कर पाएंगे, ऐसा सोचना भी उनके साथ ज्यादती करने जैसा है। वैसे सीक्वल के मामले में रोहित शेट्टी जैसा खुशकिस्मत शायद कोई नहीं। 'गोलमाल' सीरीज की उनकी तीनों फिल्मों ने उन्हें मालामाल कर दिया है, हालांकि इन तीनों फिल्मों के बारे में आज भी यही कहा जाता है कि अपने दिमाग को ताक में रखकर ही इन्हें देखें। बेसिरपैर की घटनाएं और तर्कहीन प्रस्तुतीकरण के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर 'गोलमाल' की ब्रांडिंग इतनी जबरदस्त है कि अब रोहित ने इसका चौथा पार्ट बनाने का एलान भी कर दिया है, क्योंकि वे जानते हैं कि कॉमेडी सिनेमा उस मुर्गी के समान है, जो प्रतिदिन सोने का एक अंडा दे सकती है। शायद इसीलिए साजिद खान जैसे बड़बोले शख्स ने भी कॉमेडी के नाम पर 'हे बेबी' और 'हाउसफुल' जैसी वाहियात फिल्में बनाईं और इस तरह उन्होंने यही साबित किया कि दूसरों की फिल्मों की खिल्ली उड़ाना एक अलग बात है और एक साफ-सुथरी कॉमेडी फिल्म रचना एकदम जुदा काम है। 


इंद्रकुमार ने कॉमेडी के नाम पर 'इश्क' और 'धमाल' जैसी औसत दर्जे की फिल्में बनाई हैं और पिछले दिनों जब वे 'धमाल' का सीक्वल यानी 'डबल धमाल' लेकर आए, तो भी कोई खास हलचल नहीं मचा सके। कॉमेडी फिल्मों के मोह से मधुर भंडारकर भी नहीं बच पाए। आम तौर पर तल्ख विषयों पर फिल्में बनाने वाले मधुर भी 'दिल तो बच्चा है जी' के बहाने कॉमेडी के सागर में गोते लगा चुके हैं, लेकिन न तो वे गहराई में जा पाए और न उनके हाथ कोई मोती ही लगा। अनीस बज्मी थोक के भाव कॉमेडी फिल्मों का निर्माण करते हैं। उनकी दो फिल्मों 'नो प्राब्लम' और 'थैंक यू' ने टिकट खिडक़ी पर कमजोर प्रदर्शन किया, लेकिन इससे अनीस की सेहत पर कोई फर्क नजर नहीं आया। वे सलमान खान के साथ 'रेडी' लेकर आए और बॉक्स ऑफिस के आंकड़े उनके पक्ष में रहे। 


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